वोटर आईडी गुम हो जाए तो भी कर सकते हैं वोटिंग, ये पहचान पत्र होंगे मान्य
punjabkesari.in Monday, Mar 16, 2026 - 01:00 PM (IST)
नेशनल डेस्क : देश के कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया गया है। चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही संबंधित राज्यों में चुनाव आचार संहिता भी लागू हो गई है। इसके बाद चुनावी गतिविधियां तेज हो गई हैं और राजनीतिक दलों ने भी प्रचार अभियान शुरू कर दिया है।
चुनाव आयोग ने असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा की है। अब इन राज्यों में निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मतदान कराया जाएगा और तय तारीख को ही मतगणना कर परिणाम घोषित किए जाएंगे।
इन राज्यों में कब होंगे चुनाव
चुनाव आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तारीखों पर मतदान होगा।
- असम, केरल और पुडुचेरी में मतदान 9 अप्रैल को कराया जाएगा।
- तमिलनाडु में मतदाता 23 अप्रैल को वोट डालेंगे।
- पश्चिम बंगाल में चुनाव दो चरणों में आयोजित होंगे। पहला चरण 23 अप्रैल और दूसरा चरण 29 अप्रैल को होगा।
इन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में होने वाले चुनावों के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे।
चुनाव की घोषणा के साथ लागू हुई आचार संहिता
चुनाव की तारीखों की घोषणा होते ही इन सभी राज्यों और पुडुचेरी में मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट यानी आचार संहिता लागू कर दी गई है। आचार संहिता लागू होने के बाद सरकार और राजनीतिक दलों को कई नियमों का पालन करना पड़ता है। इसके तहत नई सरकारी योजनाओं की घोषणा, सरकारी संसाधनों का चुनाव प्रचार में इस्तेमाल और मतदाताओं को प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर रोक लगाई जाती है। इसका उद्देश्य चुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना है।
मतदान से पहले मतदाताओं के मन में उठता है यह सवाल
चुनाव की तारीख सामने आने के बाद कई मतदाताओं के मन में एक आम सवाल उठता है कि अगर मतदान वाले दिन वोटर आईडी कार्ड खो जाए या घर पर रह जाए तो क्या वे वोट डाल सकते हैं या नहीं। दरअसल कई बार लोगों का वोटर आईडी कार्ड गुम हो जाता है या किसी कारण से वे उसे मतदान केंद्र पर लेकर नहीं पहुंच पाते। ऐसे में उन्हें लगता है कि शायद वे मतदान नहीं कर पाएंगे, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है।
वोटर आईडी कार्ड नहीं होने पर भी कर सकते हैं मतदान
चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार वोटर आईडी कार्ड (EPIC) मतदान के लिए सबसे सामान्य पहचान पत्र है। लेकिन अगर किसी कारण से मतदाता के पास यह कार्ड मौजूद नहीं है, तो भी वह वोट डाल सकता है। इसके लिए जरूरी शर्त यह है कि मतदाता का नाम मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) में होना चाहिए। यदि नाम सूची में दर्ज है और मतदाता अपने साथ कोई वैध पहचान पत्र लेकर आता है, तो मतदान केंद्र पर मौजूद अधिकारी उसकी पहचान की जांच कर उसे वोट डालने की अनुमति दे सकते हैं।
वोट डालने के लिए कौन-कौन से डॉक्यूमेंट मान्य हैं
अगर आपके पास वोटर आईडी कार्ड नहीं है, तो आप अन्य सरकारी पहचान पत्र दिखाकर भी मतदान कर सकते हैं। चुनाव आयोग कई दस्तावेजों को पहचान प्रमाण के रूप में मान्यता देता है।
मतदान केंद्र पर इनमें से कोई एक मूल दस्तावेज दिखाना जरूरी होता है:
- पासपोर्ट
- ड्राइविंग लाइसेंस
- आधार कार्ड
- पैन कार्ड
- बैंक या डाकघर की फोटो वाली पासबुक
- सरकारी कर्मचारी का फोटो सहित सर्विस पहचान पत्र
- एनपीआर (राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर) के तहत जारी स्मार्ट कार्ड
- मनरेगा जॉब कार्ड
- श्रम मंत्रालय द्वारा जारी स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड
- फोटो सहित पेंशन से संबंधित दस्तावेज
- सांसद, विधायक या विधान परिषद सदस्य का आधिकारिक पहचान पत्र
इनमें से किसी भी एक वैध दस्तावेज के आधार पर मतदान अधिकारी मतदाता की पहचान सत्यापित कर सकते हैं और उसे मतदान करने की अनुमति दे सकते हैं।
केवल फोटो वोटर स्लिप से नहीं डाल सकते वोट
चुनाव आयोग ने यह भी साफ किया है कि फोटो वोटर स्लिप को पहचान पत्र के रूप में स्वीकार नहीं किया जाता है। यह स्लिप सिर्फ मतदाता को यह जानकारी देने के लिए होती है कि उसका नाम किस मतदान केंद्र और किस क्रमांक पर दर्ज है। इसलिए मतदान के समय इस स्लिप के साथ कोई वैध पहचान पत्र होना जरूरी होता है।
मतदान से पहले इन बातों का रखें ध्यान
मतदान के दिन किसी तरह की परेशानी से बचने के लिए मतदाताओं को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए।
- मतदान से पहले यह सुनिश्चित करें कि आपका नाम वोटर लिस्ट में दर्ज है।
- मतदान केंद्र पर जाते समय कोई वैध पहचान पत्र जरूर साथ रखें।
- फोटो वोटर स्लिप को केवल जानकारी के लिए इस्तेमाल करें, इसे पहचान पत्र न मानें।
इस तरह अगर वोटर आईडी कार्ड उपलब्ध नहीं है, तब भी सही दस्तावेजों के साथ मतदाता अपने मतदान के अधिकार का उपयोग कर सकता है।
