लोकसभाः नागरिकता संशोधन बिल पेश करने के पक्ष में पड़े 293 वोट, विरोध में 82

12/9/2019 3:07:15 PM

नई दिल्लीः लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह नागरिकता संशोधन विधेयक को पेश किए जाने के दौरान विपक्षी सदस्यों ने संविधान की मूल भावना एवं देश के लोकतांत्रिक ढांचे को आहत करने वाला बताते हुए जमकर हंगामा किया और कहा कि यह इतिहास का काला दिन है और देश को मुस्लिम एवं गैर मुस्लिम में बांटने का प्रयास किया जा रहा है। नागरिकता संशोधन विधेयक को पेश किए जाने के पक्ष में 293 वोट पड़े जबकि विरोध में 82 वोट पड़े।

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कांग्रेस पर शाह का निशाना
शाह ने सोमवार को लोकसभा में आरोप लगाया कि धर्म के आधार पर 1947 में कांग्रेस पार्टी ने देश का विभाजन किया जिसके कारण सरकार को अब नागरिकता कानून में संशोधन के लिए विधेयक लाने की जरूरत पड़ी । लोकसभा में नागरिकता विधेयक पेश करते हुए शाह ने कहा, ‘‘कांग्रेस ने धर्म के आधार पर देश का विभाजन किया। अगर धर्म के आधार पर देश का विभाजन नहीं किया जाता तब इस विधेयक की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने कहा कि उपयुक्त श्रेणीबद्धता के आधार पर पहले भी ऐसा किया गया। इंदिरा गांधी के 1971 में कार्यकाल में बांग्लादेश बनते समय वहां से जितने लोग आए, उन सभी को नागरिकता दी गई। शाह ने सवाल किया कि तो फिर पाकिस्तान से आए लोगों को क्यों नहीं लिया (नागरिक नहीं बनाया गया) ? इसके अलावा युगांडा से आए लोगों को भी नागरिकता दी गई । दंडकारण्य कानून को लेकर आए तब भी नागरिकता दी गई । राजीव गांधी के समय भी लोगों को लिया गया ।'' उन्होंने कहा कि दुनिया के अनेक देशों में ऐसे ढेर सारे उदाहरण है जहां लोगों को नागरिकता दी गई।

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'नेहरू और अंबेडकर के सपनों का उल्लंघन है यह बिल'
कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि यह विधेयक एक लक्षित विधेयक है जिसमें एक खास समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है और यह पंडित जवाहर लाल नेहरू और डॉ. भीमराव अंबेडकर के सपनों का उल्लंघन हैं। यह संविधान के अनुच्छेद 14 की आत्मा का उल्लंघन है और हमारे लोकतंत्र के ढांचे को बर्बाद करेगा। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि यह हमारे गणराज्य को विभाजित करने का प्रयास है और देश को धार्मिक आधार पर बांटा जा रहा है और पंड़ति नेहरू तथा महात्मा गांधी ने जिस आधार पर भारत राष्ट्र का निर्माण किया था, यह विधेयक उसके मूल ढांचे पर हमला है और हम इसकी विधाायिका क्षमता का विरोध करते हैं। एआईआईएमएल नेता असददुीन औवेसी ने कहा कि यह देश के धर्मनिरपेक्षता के ढांचे पर हमला है और मूल ढांचे का उल्लंघन करता है । इस कानून के पारित होने से देश का नुकसान होगा।​​​​​​​
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क्या है इस बिल में?
मोदी सरकार नागरिकता विधेयक 1955 में बदलाव करने की तैयारी में है, नए बिल के तहत नागरिकता को लेकर कई नियमों में बदलाव होगा। अगर बिल पास होता है तो पड़ोसी देशों से भारत में आकर बसने वाले शरणार्थियों को नागरिकता देने में आसानी होगी लेकिन ये नागरिकता सिर्फ हिंदू, जैन, पारसी, बौद्ध धर्म के शरणार्थियों को ही दी जाएगी। नागरिकता मिलने का आधार 11 साल से घटाकर 6 साल कर दिया जाएगा। क्योंकि नागरिकता के लिए मुस्लिम शरणार्थियों को इसमें शामिल नहीं किया गया है इसलिए कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियां इसका विरोध कर रही हैं।


Pardeep

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