भारत में लॉकडाउन लेकिन फिर भी बढ़ रहा है कोरोना के संक्रमण का खतरा, पढ़े खास रिपोर्ट

2020-03-24T19:43:25.75

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के चलते भारत के कई राज्यों में लॉकडाउन लागू किया गया है। लेकिन जानकर कहते हैं कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले देश भारत में सिर्फ लॉकडाउन लागू करके कोरोना से नहीं बचा जा सकता है। इसके सबसे बड़ा कारण है भारत का वो तबका जो गांवों में रहता है।

दरअसल, लॉकडाउन से पहले कई बड़े रेलवे स्टेशनों पर एक खास वर्ग की भीड़ देखी गई। ये सभी लोग कोरोना के डर से अपने गांव और शहर लौट रहे थे। ऐसे में इस बात का अंदेशा लगाया जा रहा है कि कोरोना वायरस का संक्रमण भारत के ग्रामीण इलाकों तक पहुंच सकता है।

ऐसे बढ़ा कोरोना का खतरा
भारतीय मेडिकल शोध संघ (आईसीएमआर) में वायरोलॉजी के विशेष शोध के पूर्व प्रमुख डॉ. टी जेकब जॉन की माने तो भारत में कोरोना वायरस अभी रुकेगा और 15 अप्रैल तक इसका संक्रमण अपने चरम तक पहुंच जाएगा। दरअसल,  जॉन का मानना है कि लॉकडाउन कर लोगों की जिंदगियां रोक देने का फैसला अच्छा है। लेकिन इससे लोगों को संक्रमण से बचने का समय मिलेगा या नहीं, ये नहीं कहा जा सकता।

उनका कहना है कि भारत अभी कोरोना के महामारी बनने से मात्र दो कदम पीछे हैं और जिस तरह के आसार बन रहे हैं उन्हें देखते हुए यह कहा जा सकता है कि भारत लॉकडाउन का निर्णय लेने में लेट हो गया। अच्छा होता कि यह फैसला एक सप्ताह पहले लिया जाता ताकि ये ग्रामीण भारत में पहुंचने से रुक जाता।

भयावह हो सकते हैं परिणाम
जॉन इस बात को लेकर भारत को चेताते हैं कि कोरोना का संक्रमण जिस तरह से भारत में फैल रहा है उस हिसाब से कोरोना वायरस से 130 करोड़ की आबादी वाले भारत की 1 फीसदी जनता जल्दी ही इसकी चपेट में आ सकती है। इससे सबसे ज्यादा प्रभावित 80 लाख वो लोग होंगे जिन्हें पहले से कोई गंभीर बीमारी है। साथ ही उन्होंने ये भी चेतावनी दी है कि ये मामले बढ़ भी सकते हैं और अगर लॉकडाउन कहीं भी कामयाब रहा तो शायद इसका असर थोड़ा कम हो जाए।

रोकना होगा बढ़ता संक्रमण
वहीँ इस बारे में स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि हमारी सबसे बड़ी चुनौती है कि हम संक्रमण की चेन को तोड़ें। पिछले कुछ दिनों में कोरोना के मामले तेजी से सामने आए हैं और ये जागरूकता की कमी के कारण हो सकता है। दरअसल, भारत के ग्रामीण इलाकों में टीवी, स्मार्ट फ़ोन होने के बादजूद कोरोना को लेकर जागरूकता की कमी है। इतना ही नहीं भारत के शहरों में भी लोग उतने जागरूक नहीं है कि वो सामाजिक दूरी बनाये रखने के कांसेप्ट को समझ सकें।  

लॉकडाउन से पड़ेगी दोहरी मार
वहीँ, भारत की मध्यमवर्गीय आबादी और ग्रामीण इलाकों की बेरोजगारी को देखते हुए लॉकडाउन नामक व्यवस्था जल्द ही लोगों की कमर तोड़ देगी। एक तरफ जहां देश में बेसिक स्वास्थ्य सेवाएं ना ले पाने वाले लोग हैं तो वहीँ कोरोना के कहर से यह लोग खाने-पीने के भी मोहताज़ हो जाएंगे। ऐसे हालातों में सरकार को ही घर-घर तक राशन आदि पहुंचना होगा। यानी भारत स्लो इकोनॉमिक के दंश को भूल कर जल्द मंदी की तरफ बढ़ सकता है।

 


Chandan

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