राम मंदिर मामले पर PM मोदी संसद में चुप्पी तोड़ें: जयराम रमेश
punjabkesari.in Friday, Jul 17, 2026 - 04:35 PM (IST)
नेशनल डेस्क: कांग्रेस ने शुक्रवार को कहा कि राम मंदिर से चढ़ावे के कथित गबन के मामले पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को 20 जुलाई से आरंभ हो रहे संसद के मानसून सत्र में सदन के भीतर अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए, क्योंकि उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट के गठन की घोषणा भी पांच फरवरी, 2020 को लोकसभा में ही की थी। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह दावा भी किया कि जिस ट्रस्ट के गठन की घोषणा प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं संसद में की थी, उससे जुड़े ''घोटाले'' पर वह लगातार चुप्पी साधे हुए हैं। रमेश ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''वैसे तो प्रधानमंत्री लोकसभा में आते नहीं हैं। लेकिन पांच फरवरी 2020 को लोकसभा में उन्होंने 'गेस्ट अपीयरेंस' दी और घोषणा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन होगा। अभी कई खुलासे हुए हैं, चंदा चोरी हुई है, करोड़ों लोगों की आस्था के साथ धोखा हुआ है।

ट्रस्ट को लेकर कई सवाल उठे हैं।'' उन्होंने कहा कि हैरानी की बात है कि प्रधानमंत्री ने जिस ट्रस्ट को बनाने का श्रेय लिया, उससे जुड़े घोटाले और ''चंदा चोरी'' पर चुप हैं। रमेश ने कहा, ''हम मांग करेंगे कि वह सदन में अपनी चुप्पी तोड़ें। यह सिर्फ कांग्रेस की नहीं, सभी विपक्षी दलों की मांग रहेगी...यह बहुत बड़ा मुद्दा बन गया है। हम इसे उठाएंगे और याद दिलाएंगे कि आपने (प्रधानमंत्री) पांच फरवरी, 2020 को ट्रस्ट की घोषणा की थी, तो अब चुप क्यों हैं।'' अयोध्या में राम मंदिर में दान के कथित गबन की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में सोमवार को सीधे शीर्ष अदालत को अंतरिम रिपोर्ट सौंप सकती है। यह घटनाक्रम कथित चढ़ावा गबन की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच का अनुरोध करने वाली याचिकाओं पर उच्चतम न्यायालय द्वारा सुनवाई किए जाने के कुछ दिन बाद हुआ है, जिसमें एसआईटी को जांच के संबंध में वस्तुस्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था।
तीन सदस्यीय एसआईटी में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन शामिल हैं। इसका गठन 13 जून को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किया गया था। शुरुआत में इसे जांच पूरी करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया था और बाद में 15 दिन का समय और दे दिया गया था। एसआईटी द्वारा 23 जून को राज्य सरकार को सौंपी गई नौ पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद प्राथमिकी दर्ज करने, आठ आरोपियों की गिरफ्तारी, मंदिर के दान से कथित तौर पर निकाली गई नकदी की बरामदगी और ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय तथा पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे जैसे घटनाक्रम हुए। अंतिम रिपोर्ट में मंदिर के प्रशासन और दान-गणना प्रणाली में सुधारों की सिफारिश किए जाने की उम्मीद है, जिसके निष्कर्षों और संभावित सुधारात्मक उपायों पर चर्चा के लिए ट्रस्ट की 22 जुलाई को अयोध्या में बैठक होगी।
