ईरान ने खामेनेई के अंतिम संस्कार पर भारत का किया धन्यवाद; कहा-"दोस्ती का यह अनमोल जज़्बा कभी नहीं भूलेंगे", भारतीय जनता का भी जताया आभार
punjabkesari.in Tuesday, Jul 07, 2026 - 12:26 PM (IST)
International Desk: ईरान ने अपने दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल भेजने पर भारत सरकार और भारतीय जनता का सार्वजनिक रूप से आभार व्यक्त किया है। इसी बीच ईरान की अर्द्ध-सरकारी तस्नीम न्यूज़ एजेंसी ने दावा किया कि अमेरिकी दबाव के कारण कम से कम 13 देशों ने अंतिम संस्कार समारोह में हिस्सा नहीं लिया या अपने प्रतिनिधिमंडल का स्तर घटा दिया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और अमेरिका की ओर से भी इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
The Embassy of the Islamic Republic of Iran in the Republic of India extends its heartfelt gratitude and sincere appreciation to the friendly Government and people of India, especially the official delegation that attended on behalf of the Government and people of India, for… pic.twitter.com/Xv01SK2fjz
— Iran in India (@Iran_in_India) July 5, 2026
भारत को ईरान का विशेष धन्यवाद
भारत स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी संदेश में भारत सरकार, भारतीय जनता और अंतिम संस्कार में शामिल हुए आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का आभार व्यक्त किया। दूतावास ने कहा कि भारत की उपस्थिति दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों का प्रतीक है।ईरानी दूतावास ने अपने संदेश में कहा कि ईरान की जनता भारत की इस मित्रता, संवेदना और सम्मान को कभी नहीं भूलेगी। साथ ही इसे दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
अमेरिकी दबाव का दावा
तस्नीम न्यूज़ एजेंसी ने 3 जुलाई को प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि अंतिम संस्कार से लगभग एक सप्ताह पहले अमेरिका ने कई देशों को तेहरान में आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल भेजने से रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयास किए। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कम से कम पांच अरब देशों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर अंतिम संस्कार में शामिल न होने की अपील की। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि अमेरिकी दूतावासों ने कई सरकारों को चेतावनी दी कि यदि वे समारोह में शामिल हुए तो इसे वाशिंगटन के प्रति "अमैत्रीपूर्ण कदम" माना जा सकता है।
13 देशों ने घटाया प्रतिनिधित्व: रिपोर्ट
तस्नीम के अनुसार, अमेरिकी दबाव के बाद कम से कम 13 देशों ने या तो अंतिम संस्कार में भाग नहीं लिया या अपने प्रतिनिधिमंडल का स्तर कम कर दिया। रिपोर्ट में कहा गया कि इनमें पूर्वी यूरोप, अफ्रीका, फारस की खाड़ी और पूर्वी एशिया के कुछ देश शामिल थे, हालांकि किसी देश का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया।वहीं, पश्चिम एशिया मामलों के विशेषज्ञ मेहरान हाघिरियन ने सोशल मीडिया पर लिखा कि सऊदी अरब, कतर और ओमान ने आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल भेजे, जबकि संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और बहरीन ने ऐसा नहीं किया।
भारत ने बनाए रखा संतुलित रुख
भारत ने अपने आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल को अंतिम संस्कार में भेजकर पश्चिम एशिया के विभिन्न देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की अपनी पारंपरिक विदेश नीति को जारी रखा। भारत के ईरान के साथ ऊर्जा, व्यापार और संपर्क परियोजनाओं में रणनीतिक हित हैं, वहीं उसके अमेरिका, इज़राइल और खाड़ी देशों के साथ भी घनिष्ठ संबंध हैं। ईरान द्वारा सार्वजनिक रूप से भारत का विशेष धन्यवाद करना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि तेहरान ने इस कठिन समय में नई दिल्ली की उपस्थिति को विशेष महत्व दिया।
