कपालेश्वर मंदिर मोर प्रतिमा मामला : क्या बढ़ेंगी वेनू श्रीनिवासन की कानूनी मुश्किलें?

punjabkesari.in Tuesday, Sep 01, 2026 - 10:16 PM (IST)

मायलापुर के प्रसिद्ध श्री कपालेश्वर मंदिर से जुड़े कथित प्राचीन मोर प्रतिमा विवाद में उद्योगपति वेनू श्रीनिवासन की कानूनी स्थिति पर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई अहम साबित हो सकती है। करीब 22 वर्ष पुराने इस मामले में शीर्ष अदालत 2 सितंबर 2026 को एक याचिका पर सुनवाई करने वाली है, जिसमें मद्रास हाई कोर्ट द्वारा एफआईआर रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट की एडवांस कॉज लिस्ट के अनुसार, सामाजिक कार्यकर्ता और मंदिर भक्त रंगराजन नरसिम्हन की विशेष अनुमति याचिका सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।

विवाद की शुरुआत वर्ष 2004 में मंदिर में हुए जीर्णोद्धार और संरक्षण कार्यों से जुड़ी बताई जाती है। आरोप है कि इस दौरान ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व रखने वाली मूल मोर प्रतिमा को आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए बिना बदल दिया गया। बाद में इस मुद्दे को लेकर शिकायतें हुईं और मामला आपराधिक जांच तक पहुंच गया।

वेनू श्रीनिवासन उस समय मंदिर के जीर्णोद्धार से संबंधित सरकार द्वारा गठित समिति से जुड़े हुए थे। जांच और बाद की कानूनी कार्यवाही के दौरान उनका नाम सामने आया। हालांकि, श्रीनिवासन ने लगातार किसी भी चोरी या प्रतिमा को अवैध रूप से बदले जाने में अपनी संलिप्तता से इनकार किया है।

तमिलनाडु आइडल विंग की जांच के बाद इस मामले में कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ी और लंबे समय तक अदालतों में सुनवाई होती रही। श्रीनिवासन को शुरुआती चरण में अग्रिम जमानत मिली थी। इसके बाद फरवरी 2024 में मद्रास हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया, जिससे उन्हें महत्वपूर्ण राहत मिली।

लेकिन शिकायतकर्ता रंगराजन नरसिम्हन ने हाई कोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। अब शीर्ष अदालत के सामने मुख्य सवाल यह है कि क्या एफआईआर रद्द करने का निर्णय बरकरार रखा जाए या मामले में आपराधिक कार्यवाही को आगे बढ़ने दिया जाए।

2 सितंबर की सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस लंबे विवाद की अगली कानूनी दिशा तय कर सकता है। यदि हाई कोर्ट का आदेश कायम रहता है तो श्रीनिवासन को मिली राहत बरकरार रहेगी। वहीं, आदेश में हस्तक्षेप होने की स्थिति में उनके लिए यह पुराना विवाद एक बार फिर गंभीर कानूनी चुनौती बन सकता है।


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Pardeep

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