NEET PG एग्जाम प्रक्रिया की समीक्षा के लिए 12 सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी गठित, शीर्ष कोर्ट को सरकार ने दी जानकारी
punjabkesari.in Tuesday, Aug 04, 2026 - 06:32 PM (IST)
नई दिल्ली: NEET-PG 2025 परीक्षा के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ परसेंटाइल को कम करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट को बताया गया कि उसके पहले के निर्देशों के अनुसार, पोस्ट-ग्रेजुएट स्तर की नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET-PG) की समीक्षा करने के लिए 12 सदस्यों वाली एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई गई है। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच को बताया गया कि कमेटी का काम मौजूदा NEET-PG एडमिशन सिस्टम का पूरी तरह से ऑडिट करने का तरीका बनाना है। इसमें अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स शामिल होंगे। सिस्टम में कमियों और खामियों की पहचान करना तथा व्यावहारिक और लागू करने योग्य समाधान सुझाना भी कमेटी के काम का हिस्सा है।
कमेटी की संरचना
केंद्र सरकार की ओर से पेश होते हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) का एक ऑफिस ऑर्डर पेश किया। कमेटी DGHS डी. लोवनीश जी. कृष्णा की अध्यक्षता में काम करेगी और असिस्टेंट डायरेक्टर जनरल डॉ. प्रवीण कुमार दास इसके मेंबर सेक्रेटरी होंगे। इसमें नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC), नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (NBE) के प्रतिनिधियों के साथ स्वास्थ्य मंत्रालय के अन्य अधिकारी भी शामिल हैं। ASG ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि स्टेकहोल्डर्स से सुझाव मांगने के बाद रिपोर्ट सौंपने के लिए कमेटी को 8 हफ्ते का समय चाहिए होगा।
याचिका का विषय
कोर्ट NEET-PG 2025 परीक्षा के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ परसेंटाइल को कम करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था। याचिकाओं में नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज के 13 जनवरी के नोटिस को चुनौती दी गई है। संशोधित मानदंडों के तहत सामान्य श्रेणी के लिए कट-ऑफ स्कोर 276 से घटकर 103 हो गया है, जबकि SC/ST/OBC श्रेणी के लिए 235 से घटकर माइनस 40 हो गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस फैसले से बिना साबित योग्यता वाले उम्मीदवार भी पोस्ट-ग्रेजुएट मेडिकल एडमिशन के लिए योग्य हो जाते हैं। यह कदम मेडिकल शिक्षा के सर्वोच्च स्तर पर योग्यता को कमजोर करता है और मरीजों की सुरक्षा तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर सकता है। कोर्ट ने कमेटी को निर्देश दिया कि वह स्टेकहोल्डर्स से सुझाव मांगे और 8 हफ्ते के भीतर रिपोर्ट सौंपे। इसके बाद मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया।
