Indian Army : आर्मी के जवान अपनी मर्जी से नही दे सकते इस्तीफा, जानें वजह
punjabkesari.in Friday, Jan 16, 2026 - 11:02 PM (IST)
नेशनल डेस्क: भारतीय सेना में सेवा करना किसी सामान्य सरकारी नौकरी जैसा नहीं होता। जब कोई जवान या अधिकारी सशस्त्र बलों में शामिल होता है, तो वह केवल एक पद नहीं संभालता, बल्कि राष्ट्र सेवा, अनुशासन और बलिदान के लिए जीवन भर की प्रतिबद्धता निभाने की शपथ लेता है। यही कारण है कि सेना के जवान अपनी इच्छा से साधारण तरीके से इस्तीफा नहीं दे सकते। इसके पीछे सख्त कानूनी और रणनीतिक नियम हैं।
किस कानून के तहत बंधा होता है सैनिक?
भारतीय सेना के जवान सामान्य सरकारी सेवा नियमों से नहीं, बल्कि आर्मी एक्ट, 1950 के अंतर्गत शासित होते हैं। एक बार भर्ती या कमीशन मिलने के बाद सैनिक की सेवा कानूनी रूप से बाध्यकारी हो जाती है। सेना में इस्तीफा देना कोई अधिकार नहीं, बल्कि एक अनुरोध होता है, जिसे तभी स्वीकार किया जाता है जब सक्षम सैन्य प्राधिकारी औपचारिक मंजूरी दे।
क्यों नहीं दी जाती तुरंत इस्तीफे की आज़ादी?
भारतीय सेना युद्ध, आतंकवाद और आंतरिक सुरक्षा जैसे गंभीर खतरों से निपटने के लिए हर समय तैयार रहती है। यदि सैनिकों को कभी भी इस्तीफा देने की छूट मिल जाए, तो संकट की घड़ी में सेना की ताकत कमजोर पड़ सकती है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
सरकार का भारी निवेश भी है वजह
एक सैनिक को तैयार करने में सरकार करोड़ों रुपये खर्च करती है। इसमें कठोर शारीरिक प्रशिक्षण, हथियारों का संचालन, युद्ध रणनीति, तकनीकी कौशल और विशेष पाठ्यक्रम शामिल होते हैं। यदि कर्मियों को बीच में ही सेवा छोड़ने की अनुमति दे दी जाए, तो इससे न केवल सैन्य ढांचा कमजोर होगा, बल्कि देश को भारी आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ेगा।
टीमवर्क और ऑपरेशनल संतुलन पर असर
सैन्य इकाइयां मजबूत टीमवर्क और अनुशासन पर आधारित होती हैं। अचानक इस्तीफे यूनिट के संतुलन, कमांड चेन और ऑपरेशनल प्लानिंग को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं, जिससे मिशन की सफलता पर भी असर पड़ता है।
कब मिल सकती है इस्तीफा या समय से पहले रिटायरमेंट की अनुमति?
सेना इस्तीफा या प्री-मैच्योर रिटायरमेंट की अनुमति देती है, लेकिन केवल विशेष परिस्थितियों में। इनमें स्थायी चिकित्सा अयोग्यता, परिवार की देखभाल की एकमात्र जिम्मेदारी या सेवा के न्यूनतम निर्धारित वर्ष पूरे होना जैसी वजहें शामिल हैं। इन मामलों में भी अंतिम फैसला सैन्य प्राधिकरण का होता है।
ड्यूटी छोड़ना क्यों माना जाता है गंभीर अपराध?
सैन्य सेवा अनुशासन, भरोसे और बलिदान पर आधारित होती है। सैनिक राष्ट्र सेवा को अपने निजी हितों से ऊपर रखने की शपथ लेता है। बिना अनुमति ड्यूटी छोड़ना भगोड़ापन (Desertion) माना जाता है, जो एक गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में कोर्ट मार्शल की कार्रवाई हो सकती है और जेल की सजा तक हो सकती है।
