भारत को 2047 तक विकसित बनाने की यात्रा एक ''समुद्री सफर'' : नौसेना प्रमुख

punjabkesari.in Friday, Jan 23, 2026 - 05:24 PM (IST)

नेशनल डेस्क : नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने ‘विकसित भारत 2047' की तुलना एक समुद्री यात्रा से करते हुए शुक्रवार को इस बात पर जोर दिया कि भारत समेत दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं व्यापार और विकास के लिए महासागरों पर काफी हद तक निर्भर हैं। एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि दुनिया का 90 प्रतिशत निर्यात-आयात (एक्सिम) व्यापार समुद्र के रास्ते होता है और भारत का 95 प्रतिशत व्यापार समुद्री मार्गों से होता है जिससे विकसित भारत के लक्ष्य को 2047 तक प्राप्त करने के लिए महासागर प्राथमिक माध्यम बन जाते हैं।

PunjabKesari

उन्होंने ‘सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड' (सीसीएल) के ‘दरभंगा हाउस' सम्मेलन कक्ष में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘विकसित भारत 2047 अब केवल एक नीति नहीं रहा, यह अब एक वास्तविकता बन गया है और यह लक्ष्य हासिल करने के लिए स्पष्ट पड़ाव तय किए गए हैं। जैसा कि हम जानते हैं, हमारा 95 प्रतिशत व्यापार समुद्री मार्गों से होता है और दुनिया का भी करीब 90 प्रतिशत व्यापार इन्हीं पर निर्भर है। हम भौगोलिक रूप से भाग्यशाली हैं कि हमारा देश तीन तरफ से महासागरों से घिरा है और यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम इन्हें हर प्रकार की बाधा से मुक्त रखें।''

PunjabKesari

उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में सबसे पहले प्रतिक्रिया देने वाली शक्ति है और आज दुनिया इसे इसी रूप में पहचान रही है। नौसेना प्रमुख ने कहा, ‘‘नीली अर्थव्यवस्था का हमारी अर्थव्यवस्था में योगदान अभी सिर्फ चार प्रतिशत है जो बहुत कम है और विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप इसे दहाई अंकों तक बढ़ाया जाना चाहिए।'' उन्होंने कहा कि एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि ‘‘हमारी ऊर्जा जरूरतों का 88 प्रतिशत समुद्र के रास्ते आता है और यदि कच्चे तेल की कीमत प्रति मीट्रिक टन एक अमेरिकी डॉलर बढ़ती है तो भारत को अतिरिक्त 10,000 करोड़ रुपये चुकाने पड़ते हैं।‘‘ उन्होंने कहा कि इसी तरह का असर समुद्री क्षेत्र सुरक्षा को इतना महत्वपूर्ण बनाता है।

PunjabKesari

एडमिरल त्रिपाठी ने कहा, ‘‘जब म्यांमा में भूकंप आया, तो हम 500 टन राहत सामग्री लेकर सबसे पहले वहां पहुंचे और इसी तरह श्रीलंका में हमने 1,000 टन राहत सामग्री पहुंचाई।'' उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना की मुख्य भूमिका युद्धक कार्रवाई है, लेकिन उस स्थिति तक पहुंचने से पूर्व प्रतिरोधक क्षमता सबसे अहम है। उन्होंने कहा कि समुद्री मार्गों में छोटा-सा व्यवधान भी बड़ा असर डाल सकता है। 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Mehak

Related News