भारत ने 'अग्नि' मिसाइल के उन्नत संस्करण का किया परीक्षण, जानें क्या है 'मिशन दिव्यास्त्र' और MIRV तकनीक?
punjabkesari.in Sunday, May 10, 2026 - 10:22 AM (IST)
नेशनल डेस्क। भारत ने एक उन्नत अग्नि मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है जो कई पेलोड से अलग-अलग लक्ष्यों पर एकसाथ हमला करने में सक्षम है। इससे भारत उन चुनिंदा शक्तिशाली देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है जिनके पास ऐसी उन्नत रणनीतिक मिसाइल तकनीक मौजूद है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार 'मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेड री-एंट्री व्हीकल' (MIRV) सिस्टम से लैस मिसाइल का परीक्षण शुक्रवार को ओडिशा के एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया। एमआईआरवी सुविधा से एक ही मिसाइल कई अस्त्रों से अलग-अलग लक्ष्यों पर एकसाथ हमला करने में सक्षम होती है।
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हालांकि मंत्रालय ने कहा कि एमआईआरवी तकनीक से लैस उन्नत अग्नि मिसाइल का उड़ान परीक्षण किया गया लेकिन आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि यह अग्नि-5 मिसाइल थी और यह परीक्षण 'मिशन दिव्यास्त्र' के तहत एमआईआरवी तकनीक की जांच के लिए किया गया था। अग्नि-5 मिसाइल का एमआईआरवी प्रणाली के साथ पहला परीक्षण पिछले साल मार्च में किया गया था।
रक्षा मंत्रालय ने कहा, भारत ने आठ मई को ओडिशा स्थित एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से एमआईआरवी प्रणाली से लैस उन्नत अग्नि मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि मिसाइल का कई 'पेलोड' के साथ परीक्षण किया गया, जिसमें हिंद महासागर के एक बड़े भौगोलिक क्षेत्र में फैले विभिन्न लक्ष्यों को निशाना बनाया गया।
India conducted successful Flight trial of an Advanced Agni missile with MIRV (Multiple Independently Targeted Re-Entry Vehicle) system from Dr. APJ Abdul Kalam Island, Odisha on 08th May 2026, Defence Ministry confirms.
— Megh Updates 🚨™ (@MeghUpdates) May 9, 2026
The missile was flight tested with Multiple payloads,… pic.twitter.com/BzG6jwXWg7
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मिसाइल के सफल परीक्षण पर रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), भारतीय सेना और संबंधित उद्योग भागीदारों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि इससे बढ़ते खतरे के मद्देनजर देश की रक्षा तैयारियों को अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी। मंत्रालय ने बताया कि मिसाइल या परीक्षण की निगरानी और उसकी गतिविधियों का पता लगाने का काम जमीन पर स्थित तथा जहाज़ों पर लगे कई ट्रैकिंग स्टेशन द्वारा किया गया।
मंत्रालय ने कहा, इन प्रणालियों ने मिसाइल के प्रक्षेपण से लेकर सभी पेलोड के लक्ष्य पर गिरने तक के पूरे पथ की निगरानी की। उड़ान डेटा से परीक्षण के दौरान सभी मिशन उद्देश्य पूरे होने की पुष्टि हुई। मंत्रालय ने एक बयान में कहा, इस सफल परीक्षण के साथ, भारत ने एक बार फिर एक ही मिसाइल प्रणाली का उपयोग करके कई रणनीतिक लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता का प्रदर्शन किया है। यह मिसाइल डीआरडीओ की प्रयोगशालाओं द्वारा उद्योगों के सहयोग से विकसित की गई है। मंत्रालय के अनुसार परीक्षण के दौरान डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक और भारतीय सेना के कर्मी उपस्थित थे।
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अग्नि-5 मिसाइल की मारक क्षमता 5,000 किलोमीटर तक है। अग्नि 1 से 4 मिसाइल की मारक क्षमता 700 किलोमीटर से 3,500 किलोमीटर तक है और इन्हें पहले ही तैनात किया जा चुका है। अप्रैल 2024 में, भारत ने अपनी महत्वाकांक्षी बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा कार्यक्रम के तहत बंगाल की खाड़ी में ओडिशा तट के पास एक जहाज से एक एंडो-एटमॉस्फेरिक इंटरसेप्टर मिसाइल का पहला सफल परीक्षण किया था।
समुद्र आधारित इस मिसाइल के परीक्षण का उद्देश्य शत्रु बैलिस्टिक मिसाइल के खतरे को रोकना और उसे निष्क्रिय करना था जिससे भारत इस तरह की क्षमता रखने वाले विशिष्ट देशों की सूची में शामिल हो सके। भारत पृथ्वी के वायुमंडलीय सीमाओं के अंदर और बाहर दोनों जगह शत्रु बैलिस्टिक मिसाइल को रोकने की क्षमता विकसित कर रहा है।
