भारत-नेपाल के बीच अब चाय बनी दरार, सख्ती के बाद शुरू हो गया नया विवाद

punjabkesari.in Tuesday, May 26, 2026 - 02:24 PM (IST)

International Desk:  भारत-नेपाल   के बीच इन दिनों चाय को लेकर नया विवाद बढ़ता दिखाई दे रहा है। नेपाल का आरोप है कि भारत लगातार नेपाली चाय के आयात पर सख्ती बढ़ा रहा है, जबकि भारत का कहना है कि दार्जिलिंग चाय के नाम और गुणवत्ता की सुरक्षा जरूरी है। अब इस पूरे विवाद को दोनों देशों के बीच “चाय की जंग” कहा जाने लगा है।

 

क्या है पूरा मामला?
नेपाल बड़ी मात्रा में ऑर्थोडॉक्स चाय भारत को निर्यात करता है। नेपाल की बड़ी चाय मंडियां झापा और इलाम क्षेत्रों में हैं। नेपाल का दावा है कि उसकी करीब 80 प्रतिशत चाय भारतीय बाजार में बिकती है। हर साल लगभग 10 मिलियन किलोग्राम चाय भारत भेजी जाती है।  लेकिन भारत ने हाल के वर्षों में नेपाली चाय पर कई नियम और टेस्टिंग सख्त कर दिए हैं। अप्रैल 2024 में भारतीय अधिकारियों ने नेपाली चाय की 100 प्रतिशत सैंपल टेस्टिंग अनिवार्य कर दी। यानि हर खेप की जांच के बाद ही उसे भारतीय बाजार में प्रवेश मिल सकता है। इसके बाद मई 2026 से कुछ नए प्रतिबंध भी लागू किए गए। ममता बैनर्जी Mamata Banerjee ने भी कहा था कि नेपाल से बिना शुल्क आने वाली चाय दार्जिलिंग ब्रांड को नुकसान पहुंचा रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से नेपाली चाय को दी गई कर छूट वापस लेने की मांग की थी।

 

दार्जिलिंग चाय क्यों बनी विवाद ?
Darjeeling tea दुनिया की सबसे प्रसिद्ध चायों में गिनी जाती है। इसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान और ब्रांड वैल्यू बहुत बड़ी है। भारतीय पक्ष का आरोप है कि कुछ व्यापारी नेपाली चाय को दार्जिलिंग चाय के नाम से बेचते हैं, जिससे असली दार्जिलिंग ब्रांड की पहचान कमजोर होती है। इसी वजह से भारत गुणवत्ता और ब्रांड सुरक्षा के नाम पर सख्ती कर रहा है। नेपाल के चाय कारोबारी और अधिकारी भारत के कदमों को “व्यापारिक दबाव” बता रहे हैं। उनका कहना है कि भारत जानबूझकर देरी करता है। बार-बार टेस्टिंग से व्यापार प्रभावित होता है और यह नेपाल-भारत व्यापार संधि की भावना के खिलाफ है। नेपाल के कारोबारी उदय चपागाईं का कहना है कि अगर भारत को वास्तव में गुणवत्ता की चिंता होती, तो वह सीमा पर आधुनिक लैब बना सकता था। उनके अनुसार भारत का असली मकसद नेपाली चाय की प्रतिस्पर्धा को रोकना है।

 

असली विवाद बाजार हिस्सेदारी
नेपाल टी प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के नेताओं का मानना है कि असली विवाद बाजार हिस्सेदारी का है। विशेषज्ञों के अनुसार दार्जिलिंग चाय का उत्पादन सीमित है और वैश्विक मांग बहुत ज्यादा है। नेपाली ऑर्थोडॉक्स चाय सस्ती और ज्यादा उपलब्ध है। ऐसे में नेपाली चाय अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से जगह बना रही है।नेपाल का मानना है कि भारत को डर है कि नेपाली चाय की अलग पहचान बनने से दार्जिलिंग चाय का बाजार कमजोर पड़ सकता है।

 

नेपाल की भारत पर बड़ी निर्भरता
नेपाल की चाय इंडस्ट्री काफी हद तक भारत पर निर्भर है। नेपाल के नेशनल टी एंड कॉफी डेवलपमेंट बोर्ड के अनुसार नेपाल हर साल 27.5 मिलियन किलोग्राम चाय पैदा करता है जिससे करीब 60,000 लोगों को रोजगार मिलता है। 20,000 हेक्टेयर जमीन पर चाय की खेती होती है। नेपाल के लिए भारत सबसे बड़ा बाजार है, इसलिए भारतीय प्रतिबंध वहां के किसानों और निर्यातकों के लिए बड़ी चिंता बन गए हैं।

 

बढ़ सकता तनाव 
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह विवाद बढ़ता है तो दोनों देशों के व्यापारिक रिश्ते प्रभावित हो सकते हैं। नेपाली किसानों को बड़ा नुकसान हो सकता है। दार्जिलिंग और नेपाली चाय के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है। हालांकि दोनों देशों के बीच खुली सीमा और गहरे आर्थिक संबंधों को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाएगा। 


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Content Writer

Tanuja

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