भारत का वो खतरनाक द्वीप जहां भारतीयों के जाने पर भी है सख्त पाबंदी, जानिए सरकार ने क्यों लगाया बैन?

punjabkesari.in Friday, Mar 20, 2026 - 04:41 PM (IST)

नेशनल डेस्क : भारत के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्थित एक द्वीप ऐसा भी है, जो कागजों पर तो भारत का हिस्सा है, लेकिन वहां की दुनिया पूरी तरह अलग है। हम बात कर रहे हैं North Sentinel Island की, जिसे दुनिया के सबसे रहस्यमयी और खतरनाक स्थानों में गिना जाता है। यहां बाहरी लोगों के जाने पर सख्त पाबंदी है, क्योंकि यह जगह बेहद संवेदनशील और जोखिम भरी मानी जाती है।

दुनिया से कटी हुई एक अनोखी जनजाति

इस द्वीप पर रहने वाले लोगों को “सेंटिनली” कहा जाता है। माना जाता है कि ये दुनिया की आखिरी ऐसी जनजातियों में से हैं, जिन्होंने हजारों वर्षों से बाहरी दुनिया से कोई संपर्क नहीं रखा। विशेषज्ञों के अनुसार, ये लोग करीब 60,000 सालों से यहां रह रहे हैं और आज भी बेहद प्राचीन जीवनशैली अपनाए हुए हैं। उनका जीवन शिकार और समुद्री संसाधनों पर आधारित है।

जीवनशैली और परंपराएं

सेंटिनली जनजाति आज भी आधुनिक सभ्यता से दूर है। ये लोग खेती नहीं करते और सीमित संसाधनों के साथ जीवन जीते हैं। इनके रहन-सहन और परंपराएं पाषाण युग जैसी मानी जाती हैं। यही कारण है कि वैज्ञानिक और शोधकर्ता इन्हें मानव इतिहास की एक जीवित झलक के रूप में देखते हैं।

बाहरी लोगों के प्रति सख्त रवैया

इस द्वीप की सबसे खास और खतरनाक बात है यहां के लोगों का व्यवहार। सेंटिनली जनजाति बाहरी लोगों को बिल्कुल स्वीकार नहीं करती। जब भी कोई नाव या हेलिकॉप्टर द्वीप के पास पहुंचता है, तो वे तीर-कमान और पत्थरों से हमला कर देते हैं। अतीत में भी ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जब बाहरी लोगों को जान गंवानी पड़ी।

सरकार ने क्यों लगाई पाबंदी?

भारत सरकार ने इस क्षेत्र में सख्त नियम लागू किए हैं। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (आदिम जनजातियों का संरक्षण) विनियमन, 1956 के तहत इस द्वीप के आसपास जाने पर रोक है। इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं—पहला, बाहरी लोगों के लिए खतरा और दूसरा, जनजाति की सुरक्षा। इन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम मानी जाती है, जिससे कोई सामान्य बीमारी भी उनके लिए घातक हो सकती है।

प्राकृतिक आपदाओं में भी सुरक्षित

इस द्वीप का एक बड़ा रहस्य यह भी है कि यहां के लोग प्राकृतिक आपदाओं में भी सुरक्षित कैसे रहते हैं। 2004 की सुनामी के दौरान भी ये लोग सुरक्षित पाए गए थे। उन्होंने किसी बाहरी मदद को स्वीकार नहीं किया और अपनी पारंपरिक समझ से ही हालात का सामना किया।

सुरक्षा और निगरानी

इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए भारतीय सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी करती हैं। भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल इस इलाके में गश्त करते रहते हैं, ताकि कोई बाहरी व्यक्ति वहां न पहुंच सके। सरकार की नीति साफ है—जनजाति के जीवन में हस्तक्षेप किए बिना उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना।


 


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Content Editor

Mehak

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