साइबर सुरक्षा से डिफेंस रिसर्च तक, PACTS के जरिए नई रणनीतिक साझेदारी में जुड़े भारत-ऑस्ट्रेलिया
punjabkesari.in Thursday, Jul 09, 2026 - 04:19 PM (IST)
नई दिल्ली: भारत और ऑस्ट्रेलिया ने तकनीक, साइबर सुरक्षा और सप्लाई चेन को मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए पार्टनरशिप ऑन साइबर, क्रिटिकल टेक्नोलॉजी एंड सप्लाई चेन (PACTS) का बड़ा करार किया है। इस नई साझेदारी का उद्देश्य दोनों देशों के बीच उन्नत तकनीकों में सहयोग बढ़ाना, सुरक्षित और भरोसेमंद सप्लाई चेन विकसित करना तथा साइबर सुरक्षा को नई ताकत देना है। यह पहल वर्ष 2020 में दोनों देशों के बीच स्थापित रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कदम देखा जा रहा है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और डिजिटल सहयोग पर रहेगा फोकस
विदेश मंत्रालय के अनुसार, PACTS का उद्देश्य राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करना, सुरक्षित डिजिटल विकल्प उपलब्ध कराना, वैश्विक स्तर पर साइबर सुरक्षा को बढ़ावा देना और महत्वपूर्ण सप्लाई चेन को अधिक लचीला एवं भरोसेमंद बनाना है। इसके जरिए दोनों देश उभरती तकनीकों के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग को नई दिशा देंगे।
इन 5 क्षेत्रों में ऑस्ट्रेलिया के साथ बड़ा करार
1. सप्लाई चेन को बनाएंगे अधिक मजबूत
PACTS के तहत सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स की सुरक्षित एवं भरोसेमंद सप्लाई सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। दोनों देश ऐसी व्यवस्था विकसित करेंगे, जिससे किसी एक देश पर निर्भरता कम हो और वैश्विक सप्लाई चेन अधिक स्थिर बन सके।
2. डिजिटल क्षमता का होगा विस्तार
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) को बढ़ावा देने पर भी साझेदारी का विशेष फोकस रहेगा। इससे क्लीन एनर्जी, इंटरनेट कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, कौशल विकास और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा।
3. साइबर सुरक्षा को मिलेगी नई मजबूती
बढ़ते साइबर हमलों और डिजिटल खतरों से निपटने के लिए भारत और ऑस्ट्रेलिया साइबर सुरक्षा से जुड़ी जानकारी, विशेषज्ञता और अनुभव साझा करेंगे। इसका उद्देश्य पावर ग्रिड, बैंकिंग सिस्टम और अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को अधिक सुरक्षित बनाना है।
4. भविष्य की आधुनिक तकनीकों पर होगा संयुक्त काम
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), अंतरिक्ष, दूरसंचार और बायोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही सुरक्षित और भरोसेमंद AI के लिए वैश्विक मानक विकसित करने की दिशा में भी दोनों देश मिलकर काम करेंगे।
5. रक्षा अनुसंधान में बढ़ेगा सहयोग
दोनों देशों के रक्षा अनुसंधान संस्थान मिलकर नई तकनीकों के विकास और रक्षा क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान के लिए रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) करेंगे। इससे भविष्य की रक्षा तकनीकों के विकास को गति मिलने की उम्मीद है।
सरकार के साथ निजी क्षेत्र भी निभाएगा अहम भूमिका
इस साझेदारी में केवल दोनों देशों की सरकारें ही नहीं, बल्कि निजी कंपनियां, विश्वविद्यालय और अनुसंधान संस्थान भी सक्रिय रूप से भागीदारी करेंगे। इससे नई तकनीकों में निवेश बढ़ेगा, नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और रिसर्च को व्यावसायिक उत्पादों में बदलने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि PACTS के जरिए भारत और ऑस्ट्रेलिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा और अन्य महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर सुरक्षित, आधुनिक और भरोसेमंद सहयोग का एक नया मॉडल प्रस्तुत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इससे दोनों देशों के तकनीकी उद्योगों को मजबूती मिलने के साथ-साथ आर्थिक विकास को भी नई गति मिलने की संभावना है।
