India tourism: पर्यटन से बदल रहा भारत: 100 से अधिक Destinations का कायाकल्प, 10 साल में नई ऊंचाइयों पर पहुंचा टूरिस्ट सेक्टर

punjabkesari.in Thursday, Jun 25, 2026 - 12:44 PM (IST)

नई दिल्ली:  पर्यटन केवल घूमने-फिरने और छुट्टियां बिताने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। पर्यटकों की हर यात्रा होटल, परिवहन, टूर गाइड, कारीगरों, रेस्तरां और स्थानीय व्यवसायों के लिए नए अवसर पैदा करती है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।

भारत जैसे विविधताओं से भरे देश में पर्यटन क्षेत्र क्षेत्रीय विकास का प्रमुख इंजन बनकर उभरा है। यह दूरदराज और उभरते क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देता है, स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं तथा प्राकृतिक सुंदरता को दुनिया के सामने प्रस्तुत करता है।

देश के महानगरों, धार्मिक स्थलों, गांवों, समुद्र तटों, पर्वतीय क्षेत्रों और पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थानों तक पर्यटन का विस्तार तेजी से बढ़ा है। पिछले 10 साल में सरकार की नीतिगत पहलों, बेहतर कनेक्टिविटी और पर्यटन अवसंरचना विकास ने इस क्षेत्र को नई दिशा दी है।

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2014 से 2025 के बीच पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि

वर्ष 2014 से 2025 के दौरान भारत में 18.12 करोड़ अंतरराष्ट्रीय आगमन दर्ज किए गए, जबकि विदेशी पर्यटक आगमन का आंकड़ा 9.33 करोड़ रहा। अंतरराष्ट्रीय आगमन में विदेशी नागरिकों के साथ-साथ अनिवासी भारतीय (NRI) भी शामिल हैं, जबकि विदेशी पर्यटक आगमन केवल विदेशी नागरिकों की संख्या को दर्शाता है। बेहतर राजमार्ग, आधुनिक रेलवे स्टेशन और मजबूत परिवहन संपर्क देश के पर्यटन स्थलों को पहले से अधिक सुलभ बना रहे हैं, जिससे विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को बल मिल रहा है।

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स्वदेश दर्शन योजना से पर्यटन अवसंरचना को मिला नया स्वरूप

सरकार ने वर्ष 2014 में स्वदेश दर्शन और प्रसाद योजनाओं की शुरुआत कर पर्यटन विकास के लिए व्यापक दृष्टिकोण अपनाया। स्वदेश दर्शन योजना के तहत देशभर के 15 पर्यटन सर्किटों में 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 76 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इनमें से 75 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जिससे पर्यटन सुविधाओं और कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

वर्ष 2022 में शुरू किए गए स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत टिकाऊ और अनुभव-आधारित पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। उत्तराखंड की टिहरी झील में फ्लोटिंग लॉग हट्स और हरियाणा के कुरुक्षेत्र में महाभारत-आधारित थीम आकर्षण इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

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प्रसाद योजना से धार्मिक पर्यटन को मिला बढ़ावा

देश में धार्मिक पर्यटन का दायरा लगातार बढ़ रहा है। इस क्षेत्र की क्षमता को देखते हुए प्रसाद योजना के तहत 1,700 करोड़ रुपये से अधिक की 54 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इससे सोमनाथ, श्रीशैलम और उत्तर प्रदेश के गोवर्धन जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों पर सुविधाओं और सुरक्षा में सुधार हुआ है। सरकार पर्यटन विकास को पूर्वोत्तर भारत, ग्रामीण क्षेत्रों और पूर्वोदय राज्यों के विकास से भी जोड़ रही है। हाल के बजट प्रावधानों में प्रतिष्ठित पर्यटन स्थलों के विकास और रखरखाव पर विशेष जोर दिया गया है।

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वैश्विक पर्यटन केंद्रों के विकास पर फोकस

केंद्र सरकार ने बजट 2024-25 के तहत पूंजी निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता योजना (SASCI) शुरू की है। इसके अंतर्गत 23 राज्यों में 3,295.76 करोड़ रुपये की लागत से 40 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनका उद्देश्य उच्च क्षमता वाले पर्यटन स्थलों को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्रों में विकसित करना है।

टिकाऊ पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण पर जोर

पर्यटन के बढ़ते विस्तार के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्थिरता को प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार ओवरटूरिज्म की समस्या से निपटने के लिए हिमालयी ट्रेकिंग मार्ग, बर्ड वॉचिंग सर्किट और कछुआ पर्यटन जैसे विशेष पर्यटन उत्पादों को बढ़ावा दे रही है।

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‘ट्रैवल फॉर लाइफ’ कार्यक्रम के माध्यम से पर्यटकों, व्यवसायों और स्थानीय समुदायों को पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। भारत के सतत पर्यटन प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। मामल्लापुरम दक्षिण एशिया का पहला यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल बन गया है जिसे ग्रीन डेस्टिनेशन सिल्वर ग्लोबल सर्टिफिकेशन प्राप्त हुआ है।

तकनीक और वैश्विक पहुंच से मजबूत हुआ पर्यटन क्षेत्र

भारत ने डिजिटल तकनीक और नीतिगत सुधारों के माध्यम से पर्यटन को अधिक सुविधाजनक बनाया है। ई-टूरिस्ट वीजा प्रणाली ने विदेशी पर्यटकों के लिए भारत की यात्रा को आसान बनाया है। वहीं, निधि और निधि प्लस जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर्यटन उद्योग की प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बना रहे हैं।

वर्ष 2024 में भारत में 2.06 करोड़ अंतरराष्ट्रीय पर्यटक पहुंचे, जिससे देश वैश्विक पर्यटन रैंकिंग में 20वें स्थान पर पहुंच गया। वर्ष 2016 में भारत का स्थान 25वां था। भारत की जी-20 अध्यक्षता ने भी देश की सांस्कृतिक विरासत, हस्तशिल्प और पर्यटन क्षमता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कौशल विकास और घरेलू पर्यटन पर विशेष ध्यान

सरकार पर्यटन क्षेत्र में मानव संसाधन विकास को भी प्राथमिकता दे रही है। वर्ष 2014 से 2025 के बीच क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के तहत 4.5 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने की अपील के बाद ‘देखो अपना देश’ अभियान को नए स्वरूप में फिर से शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इसका उद्देश्य लोगों को कम प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों और नए पर्यटन सर्किटों की यात्रा के लिए प्रेरित करना है।

100 से अधिक पर्यटन स्थलों का Upgradation किया गया

वर्तमान में भारत विश्व की शीर्ष पर्यटन अर्थव्यवस्थाओं में आठवें स्थान पर है और यह क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था में 231.6 अरब डॉलर का योगदान दे रहा है। विश्व यात्रा एवं पर्यटन परिषद (WTTC) का अनुमान है कि अगले दशक में भारत वैश्विक स्तर पर चौथे स्थान पर पहुंच सकता है।

पिछले दस वर्षों में 100 से अधिक पर्यटन स्थलों का Upgradation किया गया है, जबकि 50 प्रमुख पर्यटन केंद्रों के विकास की योजना पर काम जारी है। आधुनिक हवाई अड्डे, वंदे भारत ट्रेनें, बेहतर सड़क नेटवर्क और मजबूत लास्ट-माइल कनेक्टिविटी पर्यटन को नई गति दे रहे हैं। इसके साथ ही ‘अतुल्य भारत’ अभियान को भी नए रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत की पर्यटन पहचान और मजबूत हो रही है।


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Content Editor

Anu Malhotra

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