सोना आयात करना अब नहीं होगा आसान, DGFT ने लगाई लिमिट और जांच की नई शर्त
punjabkesari.in Thursday, May 14, 2026 - 10:07 PM (IST)
नई दिल्ली: देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए केंद्र सरकार ने सोने के आयातकों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सरकार ने एडवांस ऑथराइजेशन (AA) स्कीम के तहत सोने के आयात की अधिकतम सीमा 100 किलोग्राम तय कर दी है। इसके साथ ही जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर के लिए अनुपालन और निगरानी के नियमों को भी बेहद सख्त बना दिया गया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने गुरुवार को इस संबंध में तत्काल प्रभाव से अधिसूचना जारी कर दी है।
पहली बार आवेदन करने वालों पर रहेगी 'तीसरी आंख'
सरकार ने नए आयातकों के लिए नियमों को और कड़ा कर दिया है। अब अगर कोई पहली बार इस स्कीम के तहत सोना आयात करने के लिए आवेदन करता है, तो उसके मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का अनिवार्य रूप से फिजिकल निरीक्षण किया जाएगा। क्षेत्रीय अधिकारी खुद मौके पर जाकर देखेंगे कि वहां उत्पादन की क्षमता और स्थिति क्या है, ताकि किसी भी तरह की धोखाधड़ी को रोका जा सके।
निर्यात का लक्ष्य पूरा करने पर ही मिलेगा अगला कोटा
अब सोना मंगाना केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार ने भविष्य के आयात को निर्यात प्रदर्शन से जोड़ दिया है। नए नियमों के मुताबिक, किसी भी आयातक को अगला कोटा तभी जारी किया जाएगा जब उसने पिछले आयात पर तय निर्यात जिम्मेदारी (Export Obligation) का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा पूरा कर लिया हो।
हर 15 दिन में देनी होगी रिपोर्ट, चार्टर्ड अकाउंटेंट करेंगे तस्दीक
निगरानी को और मजबूत करने के लिए अब आयातकों को हर 15 दिन (पखवाड़े) में अपनी परफॉर्मेंस रिपोर्ट देनी होगी। इस रिपोर्ट को किसी स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से प्रमाणित कराना अनिवार्य होगा, जिसमें सोने के आयात और निर्यात का पूरा विवरण देना होगा। इसके अलावा क्षेत्रीय अधिकारी भी हर महीने अपनी विस्तृत रिपोर्ट मुख्यालय को भेजेंगे।
क्यों लिया गया यह कड़ा फैसला?
सरकार का यह कदम उस घोषणा के महज एक दिन बाद आया है, जिसमें सोने और चांदी पर आयात शुल्क (Import Duty) को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर सीधा 15 प्रतिशत कर दिया गया था। दरअसल, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक अनिश्चितता के कारण भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ रहा है। साल 2025-26 में भारत का स्वर्ण आयात 24 प्रतिशत बढ़कर 71.98 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया था, जिसे नियंत्रित करने के लिए सरकार ने यह 'मास्टरस्ट्रोक' चला है।
