भारत-चीन साथ आए तो ट्रंप के टैरिफ का असर खत्म हो जाएगा, अर्थशास्त्री जिम ओ''नील का बड़ा दावा
punjabkesari.in Monday, Aug 10, 2026 - 12:24 AM (IST)
नेशनल डेस्क : प्रसिद्ध ब्रिटिश अर्थशास्त्री और BRICS शब्द देने वाले लॉर्ड जिम ओ'नील ने कहा है कि अगर भारत और चीन आपसी मतभेदों को पीछे छोड़कर मुक्त व्यापार शुरू कर दें, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति का वैश्विक असर काफी कम हो सकता है।
एक इंटरव्यू में ओ'नील ने कहा कि अगर भारत और चीन वास्तव में एक-दूसरे के साथ फ्री ट्रेड शुरू कर देते हैं, तो दुनिया के देशों के लिए ट्रंप टैरिफ को लेकर कही जा रही बातों की अहमियत कम हो जाएगी। उन्होंने भारत और चीन को दुनिया के दो बेहद महत्वपूर्ण बाजार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी अमेरिकी टैरिफ के दबाव को काफी हद तक बेअसर कर सकती है।
रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ की तैयारी
ओ'नील का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है। अमेरिकी सीनेट में इस संबंध में एक विधेयक पारित किया गया है, जिसमें रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने का प्रावधान है। हालांकि, इसे कानून बनने के लिए अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की मंजूरी भी जरूरी है। ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीतियों को लेकर वैश्विक बाजारों में पहले भी चिंता देखने को मिली है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि व्यापक टैरिफ से व्यापार लागत बढ़ सकती है और इसका असर उपभोक्ताओं तथा वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है।
"If India and China could genuinely establish free trade with each other, nobody else would give a damn about what Donald Trump says about tariffs," says economist Jim O'Neill who coined the idea of BRICS pic.twitter.com/lsSnX5YBV7
— Shashank Mattoo (@MattooShashank) August 9, 2026
भारत-चीन के बड़े बाजार का फायदा
भारत और चीन दुनिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले देशों के साथ-साथ बड़े और तेजी से बढ़ते बाजार हैं। ओ'नील के तर्क के मुताबिक, अगर दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाएं कम होती हैं और मुक्त व्यापार को बढ़ावा मिलता है, तो दोनों देशों के लिए एक बड़ा संयुक्त बाजार तैयार हो सकता है। ऐसी स्थिति में भारत और चीन को अमेरिका और अन्य पश्चिमी बाजारों पर अपनी निर्भरता कम करने का मौका मिल सकता है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को भी बढ़ावा मिलने की संभावना होगी।
भारत-चीन मुक्त व्यापार समझौता आसान नहीं
हालांकि, ओ'नील ने माना कि भारत और चीन के बीच व्यापक मुक्त व्यापार समझौता करना आसान नहीं होगा। दोनों देशों के बीच लंबे समय से सीमा विवाद और रणनीतिक मतभेद हैं। इसके अलावा दक्षिण एशिया में चीन की बढ़ती भूमिका और भारत के साथ उसके संबंध भी दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को प्रभावित करते हैं।
भारत और चीन के बीच मौजूदा व्यापार में भी चीन का पलड़ा भारी है। भारत लंबे समय से चीन के साथ बड़े व्यापार घाटे का सामना कर रहा है। ऐसे में भारत में यह चिंता बनी रहती है कि अगर व्यापार पूरी तरह से खोल दिया गया तो चीनी उत्पादों की बड़ी मात्रा भारतीय बाजार में आ सकती है, जिससे घरेलू उद्योगों पर दबाव बढ़ सकता है।
