Blood Pressure Treatment: मिनटों में होगा हाई बीपी का इलाज, सामने आई बड़ी मेडिकल तकनीक
punjabkesari.in Saturday, Aug 30, 2025 - 11:21 AM (IST)

नई दिल्ली: हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन — एक ऐसी बीमारी जो अक्सर बिना लक्षण के शरीर को भीतर ही भीतर खा जाती है। दिल का दौरा, स्ट्रोक और किडनी फेलियर जैसे खतरों से जुड़ी इस “साइलेंट किलर” बीमारी को लेकर अब मेडिकल साइंस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। भारत समेत 4 देशों के शोधकर्ताओं ने मिलकर एक नया डिजिटल टूल विकसित किया है, जो महज कुछ मिनटों में ये तय कर देगा कि मरीज को कौन-सी दवा सबसे बेहतर असर देगी।
अब HIGH BP का इलाज होगा डेटा-ड्रिवन
भारत, अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने मिलकर एक ऑनलाइन टूल तैयार किया है, जो हाई ब्लड प्रेशर के इलाज को पहले से कहीं अधिक सटीक बना देगा। इस टूल का नाम है - Blood Pressure Treatment Efficacy Calculator यानी बीपी ट्रीटमेंट कैलकुलेटर। यह टूल डॉक्टरों की मदद करेगा कि वे मरीज को कौन-सी दवा दें और कितनी मात्रा में दें जिससे उसका ब्लड प्रेशर जल्दी और सुरक्षित स्तर तक आ सके।
कैसे करता है यह टूल काम?
इस टूल को बनाने से पहले शोधकर्ताओं ने 1 लाख से ज्यादा मरीजों पर किए गए करीब 500 मेडिकल ट्रायल्स के आंकड़ों का विश्लेषण किया। इन आंकड़ों के आधार पर यह टूल बताता है कि कौन-सी दवा, किस खुराक में और किस मरीज के लिए कितनी प्रभावी साबित हो सकती है।
यह कैलकुलेटर तीन लेवल में दवाओं के असर को विभाजित करता है:-
-निम्न तीव्रता
-मध्यम तीव्रता
-उच्च तीव्रता
डॉक्टर इन स्तरों को देखकर यह तय कर सकते हैं कि मरीज के लिए किस दवा की जरूरत है और कितनी डोज़ में।
अब नहीं करना होगा Trial-and-Error
अभी तक हाई बीपी के इलाज में डॉक्टरों को कई बार अलग-अलग दवाएं आज़मानी पड़ती थीं ताकि यह पता चले कि मरीज पर कौन-सी दवा बेहतर असर कर रही है। इससे इलाज में देरी और रिस्क दोनों बढ़ जाते थे। लेकिन इस स्मार्ट टूल की मदद से अब शुरुआत से ही मरीज को टारगेटेड दवा मिल सकेगी।
क्या हो सकता है इसका फायदा?
सटीक इलाज: शुरुआत से ही सही दवा और डोज मिलने से मरीज का ब्लड प्रेशर जल्दी कंट्रोल हो सकेगा
रोगों से बचाव: हृदयाघात, स्ट्रोक और किडनी फेलियर जैसे गंभीर परिणामों से बचा जा सकेगा
कम साइड इफेक्ट्स: अनावश्यक दवाओं से होने वाले दुष्प्रभावों की संभावना कम होगी
डॉक्टरों की सहायता: कैलकुलेटर से डॉक्टरों को इलाज तय करने में वैज्ञानिक आधार मिलेगा