शुगर के मरीजों के लिए Warning: इस दवा का दिमाग पर पड़ रहा सीधा असर, हुआ चौंकाने वाला खुलासा

punjabkesari.in Sunday, Mar 29, 2026 - 09:03 AM (IST)

Diabetes Breakthrough : डायबिटीज (मधुमेह) की सबसे पुरानी और भरोसेमंद दवा मेटफॉर्मिन (Metformin) को लेकर चिकित्सा जगत में एक बड़ी हलचल मची है। अब तक डॉक्टर और वैज्ञानिक यही मानते थे कि यह दवा मुख्य रूप से हमारे लीवर और आंतों पर काम करके ब्लड शुगर को नियंत्रित करती है लेकिन अमेरिका के बेलर कॉलेज ऑफ मेडिसिन की एक ताजा स्टडी ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है।

दिमाग का खास हिस्सा करता है शुगर कंट्रोल

जर्नल साइंस एडवांसेज में प्रकाशित इस रिसर्च के अनुसार मेटफॉर्मिन का असली खेल हमारे दिमाग के एक छोटे से हिस्से में छिपा है जिसे वेंट्रोमेडियल हाइपोथैलेमस (Ventromedial Hypothalamus) कहा जाता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि यह हिस्सा शरीर में ग्लूकोज के संतुलन (Glucose Balance) को बनाए रखने में मास्टर कंट्रोलर की भूमिका निभाता है। चौंकाने वाली बात यह है कि मेटफॉर्मिन सीधे तौर पर इसी हिस्से को प्रभावित करती है।

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कैसे काम करती है यह प्रक्रिया? 

रिसर्च में दो मुख्य पात्र सामने आए हैं जो शुगर कंट्रोल करने में दवा की मदद करते हैं:

Rap1 प्रोटीन: यह एक खास तरह का प्रोटीन है। स्टडी में देखा गया कि जब इस प्रोटीन की एक्टिविटी को कम किया गया तो मेटफॉर्मिन ने ब्लड शुगर को बहुत ही प्रभावी ढंग से घटाया।

SF1 न्यूरॉन्स: दिमाग की ये कोशिकाएं मेटफॉर्मिन के संकेत मिलते ही सक्रिय हो जाती हैं और दवा के असर को पूरे शरीर में फैलाने में मदद करती हैं।

दिलचस्प प्रयोग: जब रिसर्च के दौरान मेटफॉर्मिन को सीधे दिमाग में इंजेक्ट किया गया तो दवा की बहुत कम मात्रा ने भी ब्लड शुगर लेवल को बेहद तेजी से नीचे गिरा दिया। वहीं जिन चूहों में Rap1 प्रोटीन नहीं था उन पर दवा का कोई असर नहीं हुआ।

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अब तक की सोच में बड़ा बदलाव

इस स्टडी ने यह साफ कर दिया है कि मेटफॉर्मिन को लीवर या आंतों पर असर दिखाने के लिए दवा की बड़ी मात्रा (High Concentration) की जरूरत होती है। इसके विपरीत हमारा दिमाग दवा की बहुत कम मात्रा पर भी तुरंत रिस्पॉन्स (React) करता है।

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भविष्य में क्या होगा फायदा?

यह खोज भविष्य में डायबिटीज के इलाज की दिशा बदल सकती है। रिसर्चर्स का मानना है कि अब ऐसी टारगेटेड दवाएं (Targeted Medicines) बनाई जा सकेंगी जो सीधे दिमाग के उन खास हिस्सों पर काम करेंगी। इससे मरीजों को कम डोज में बेहतर नतीजे मिलेंगे और दवा के अन्य साइड इफेक्ट्स से भी बचा जा सकेगा।


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Content Editor

Rohini Oberoi

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