कार खरीदने वालों के लिए खुशखबरी, नहीं होगा कोई भी धोखा... सरकार ला रही नया नियम

punjabkesari.in Wednesday, Jan 21, 2026 - 07:06 PM (IST)

नेशनल डेस्क: गाड़ी खरीदते समय सबसे पहला सवाल अक्सर यही होता है- यह कार कितना माइलेज देगी? लेकिन ज्यादातर ग्राहकों का अनुभव यही रहा है कि शोरूम में बताए गए माइलेज के आंकड़े सड़क पर उतरते ही बदल जाते हैं, खासकर जब एसी चालू किया जाए। इसी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए सरकार अब माइलेज टेस्टिंग के नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही है, ताकि ग्राहकों को ज्यादा सटीक और भरोसेमंद जानकारी मिल सके।

अब एसी ऑन करके होगा माइलेज टेस्ट

यूनियन रोड ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री ने प्रस्ताव रखा है कि 1 अक्टूबर 2026 से भारत में बिकने वाली सभी पैसेंजर कारों का माइलेज टेस्ट एसी चालू रखकर किया जाएगा। अभी तक ज्यादातर ऑटो कंपनियां बिना एसी के माइलेज टेस्ट करती थीं, जिससे कंपनी के दावों और असली ड्राइविंग कंडीशन के बीच बड़ा अंतर रह जाता था।

AIS 213 स्टैंडर्ड से तय होगी फ्यूल एफिशिएंसी

ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक, M1 कैटेगरी यानी पैसेंजर गाड़ियों का माइलेज टेस्ट अब AIS 213 स्टैंडर्ड के तहत किया जाएगा। इस प्रक्रिया में एसी चालू रहेगा और उसी हालत में फ्यूल एफिशिएंसी मापी जाएगी। चूंकि भारत जैसे गर्म देश में बिना एसी गाड़ी चलाना लगभग नामुमकिन है, ऐसे में यह नियम ग्राहकों को ज्यादा वास्तविक माइलेज की तस्वीर दिखाएगा।

ऑटो कंपनियों पर बढ़ेगा दबाव

एसी ऑन माइलेज टेस्ट लागू होने से ऑटो कंपनियों की जवाबदेही भी बढ़ेगी। अब वे सिर्फ लैब कंडीशन वाले आंकड़ों के भरोसे ग्राहकों को आकर्षित नहीं कर पाएंगी। इससे कार खरीदते समय ग्राहकों को अलग-अलग मॉडलों की सही तुलना करने और बेहतर फैसला लेने में मदद मिलेगी। फिलहाल सरकार ने इस ड्राफ्ट पर 30 दिन के लिए सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।

माइलेज ही नहीं, सेफ्टी पर भी कस रहा शिकंजा

सरकार सिर्फ माइलेज ही नहीं, बल्कि सेफ्टी को लेकर भी नियम सख्त करने की तैयारी में है। Bharat NCAP 2 के तहत नए सेफ्टी नियम 1 अक्टूबर 2027 से लागू करने का प्रस्ताव है। इसमें कारों की सेफ्टी रेटिंग अब केवल क्रैश टेस्ट तक सीमित नहीं रहेगी।

पांच पैमानों पर होगी गाड़ियों की सेफ्टी जांच

नई व्यवस्था में वाहनों को क्रैश प्रोटेक्शन, पैदल यात्रियों की सुरक्षा, सेफ ड्राइविंग फीचर्स, क्रैश अवॉयडेंस और हादसे के बाद की सुरक्षा जैसे पांच अहम पैमानों पर परखा जाएगा। पहली बार यूरोपियन स्टैंडर्ड की तर्ज पर पैदल चलने वालों और दोपहिया सवारों की सुरक्षा को खास महत्व दिया जाएगा।

VRU सेफ्टी को मिलेगा 20% वेटेज

वल्नरेबल रोड यूजर्स यानी पैदल यात्री और दोपहिया सवारों की सुरक्षा को कुल सेफ्टी रेटिंग में 20 प्रतिशत वेटेज देने का प्रस्ताव है। यह बदलाव भारतीय सड़कों की हकीकत को ध्यान में रखते हुए किया गया है, जहां सबसे ज्यादा खतरा इन्हीं यूजर्स को रहता है।

अब तक क्यों दिखता था माइलेज का फर्क?

अब तक कंपनियां यूरोपीय मानकों के अनुसार बिना एसी के माइलेज टेस्ट करती थीं और वही आंकड़े वेबसाइट और ब्रॉशर में दिखाए जाते थे। जबकि भारत जैसे देश में एसी के बिना ड्राइविंग मुश्किल है। जैसे ही एसी चालू होता है, माइलेज पर असर पड़ता है और यहीं से कंपनी के दावों और ग्राहकों के असली अनुभव के बीच फर्क साफ नजर आने लगता है।


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News Editor

Parveen Kumar

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