Gold/Silver Down: सोने-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट: 72 घंटों के अंदर सोना 30,000 रुपये प्रति दस ग्राम सस्ता, चांदी 144,500 रुपए सस्ती

punjabkesari.in Tuesday, Feb 03, 2026 - 08:25 AM (IST)

नेशनल डेस्क: कल तक जो सोना और चांदी आम आदमी की पहुंच से दूर होते जा रहे थे, अब उनकी कीमतों में ऐसी गिरावट आई है कि हर कोई हैरान है। दिल्ली के सर्राफा बाजार से लेकर वैश्विक वायदा बाजार तक, कीमती धातुओं की चमक फीकी पड़ती दिख रही है। सिर्फ 72 घंटों के भीतर चांदी के दाम में लगभग 1,44,500 रुपये की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है, वहीं सोना भी 30,000 रुपये प्रति दस ग्राम तक सस्ता हो गया है। बाजार के पंडितों की मानें तो यह तो बस शुरुआत है और आने वाले दिनों में कीमतें और भी नीचे गोता लगा सकती हैं।

पीक से धड़ाम हुए दाम

अभी बीते 29 जनवरी को ही सोने और चांदी ने अपनी ऊंचाइयों के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। चांदी 4 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर को पार कर गई थी, लेकिन जैसे ही अमेरिका से केविन वॉर्श को अगला फेड चेयरमैन बनाने की चर्चा उठी, बाजार का रुख पूरी तरह पलट गया। ऑल इंडिया सराफा एसोसिएशन के आंकड़े बताते हैं कि चांदी अब 2.60 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई है, जो अपने उच्चतम स्तर से लगभग 36 प्रतिशत कम है। सोने का हाल भी कुछ ऐसा ही है; 1.83 लाख रुपये के रिकॉर्ड स्तर से फिसलकर 99.9% शुद्धता वाला सोना अब 1,52,700 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा है।

गिरावट के पीछे की इनसाइड स्टोरी

इस बड़ी बिकवाली के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों ने निवेशकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। साथ ही, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने से सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग घटी है। घरेलू मोर्चे पर उम्मीद की जा रही थी कि बजट 2026-27 में आयात शुल्क (Import Duty) में बदलाव होगा, लेकिन सरकार ने इसे जस का तस रखा, जिससे बाजार को कोई सहारा नहीं मिला। इसके अलावा, ऊंचे भाव पर निवेशकों द्वारा जमकर की गई मुनाफावसूली ने भी कीमतों को नीचे धकेलने का काम किया है।

वैश्विक बाजार और भविष्य की राह

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी हाजिर सोना और चांदी दबाव में हैं। $4,781 प्रति औंस के स्तर पर कारोबार कर रहे सोने पर डॉलर की मजबूती का सीधा असर दिख रहा है। अब सबकी निगाहें इस हफ्ते आने वाले अमेरिका के बेरोजगारी आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के बयानों पर टिकी हैं। इसके साथ ही मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति और भारत समेत प्रमुख देशों के मौद्रिक नीति संबंधी फैसले यह तय करेंगे कि सोने की चमक दोबारा लौटेगी या गिरावट का यह सिलसिला अभी और लंबा खिंचेगा।


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Content Editor

Anu Malhotra

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