''अगर पैसा पूरा, तो डेटा आधा क्यों?’ संसद में राघव चड्ढा ने mobile recharge के ''अदृश्य खेल'' पर उठाई आवाज, साथ रखी ये 3 मांगें
punjabkesari.in Monday, Mar 23, 2026 - 05:00 PM (IST)
Raghav Chadha in Rajya Sabha: हम अक्सर देखते हैं कि मोबाइल रिचार्ज खत्म होते ही हमारा बचा हुआ डेटा पानी की तरह बह जाता है। आम आदमी की इस पीड़ा को आज राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने प्रमुखता से उठाया। चड्ढा ने टेलीकॉम कंपनियों की 'डेली डेटा लिमिट' नीति को आड़े हाथों लेते हुए इसे ग्राहकों के साथ एक 'बड़ा धोखा' करार दिया।
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Telecom Companies ऐसे Recharge Plans offer करती हैं जिनमें ‘Daily Data Limits’ जैसे 1.5GB, 2GB या 3GB per day होती हैं, जो हर 24 hours में reset हो जाती हैं। बचा हुआ data midnight पर expire हो जाता है, जबकि उसके पूरे पैसे पहले ही दिए जा चुके होते हैं।
— Raghav Chadha (@raghav_chadha) March 23, 2026
आपको 2GB के लिए charge किया… pic.twitter.com/i7Ib42nFMK
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'रात 12 बजे डेटा गायब होना कोई इत्तेफाक नहीं'
संसद में अपनी बात रखते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि कंपनियां 1.5GB से लेकर 3GB तक के डेली प्लान बेचती हैं, जिसके लिए ग्राहक पूरा पैसा चुकाता है। लेकिन दुख की बात यह है कि अगर आप उस डेटा का उपयोग नहीं कर पाते, तो आधी रात होते ही वह डेटा 'जीरो' हो जाता है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाते हुए लिखा कि यह कंपनियों की सोची-समझी रणनीति है—या तो बेमतलब इस्तेमाल करो, या फिर उसे खो दो।
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Telecom companies offer Recharge Plans with ‘𝐃𝐚𝐢𝐥𝐲 𝐃𝐚𝐭𝐚 𝐋𝐢𝐦𝐢𝐭𝐬’ like 1.5GB, 2GB or 3GB per day, resetting every 24 hours. Any Unused Data EXPIRES at midnight, despite being fully paid for.
— Raghav Chadha (@raghav_chadha) March 23, 2026
𝐘𝐨𝐮 𝐚𝐫𝐞 𝐛𝐢𝐥𝐥𝐞𝐝 𝐟𝐨𝐫 𝟐𝐆𝐁. 𝐘𝐨𝐮 𝐮𝐬𝐞 𝟏.𝟓𝐆𝐁. 𝐓𝐡𝐞… pic.twitter.com/sWiJbKj2AV
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राघव चड्डा ने पेश किए 3 सुझाव
सांसद ने सदन के माध्यम से सरकार और रेगुलेटरी अथॉरिटी के सामने तीन मुख्य प्रस्ताव रखे, जो सीधे तौर पर करोड़ों मोबाइल यूजर्स की जेब को राहत दे सकते हैं:
1. डेटा कैरी-फॉरवर्ड होना चाहिए: अगर आज का डेटा बच गया है, तो वह अगले दिन की लिमिट में जुड़ना चाहिए। यानी ग्राहक का पैसा बेकार नहीं जाना चाहिए।
2. बिल में एडजस्टमेंट: यदि कोई यूजर लगातार अपने डेटा कोटा का कम इस्तेमाल कर रहा है, तो अगले महीने के रिचार्ज में उसे उचित डिस्काउंट मिलना चाहिए।
3. डेटा ट्रांसफर की सुविधा: डेटा को उपभोक्ता की 'डिजिटल प्रॉपर्टी' माना जाए। जैसे हम ऑनलाइन पैसे भेजते हैं, वैसे ही बचा हुआ डेटा दोस्तों या परिवार को भेजने की आजादी मिलनी चाहिए।

कंपनियों की 'चालाकी' पर भी बरसे चड्ढा
राघव चड्ढा ने टेलीकॉम सेक्टर के उस 28 दिनों वाले गणित पर भी सवाल उठाए, जिसके चलते ग्राहकों को साल में 12 की जगह 13 बार रिचार्ज करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि रिचार्ज की अवधि खत्म होते ही इनकमिंग कॉल और मैसेज बंद करना उन लोगों के लिए बेहद घातक है जो साधारण कीपैड फोन इस्तेमाल करते हैं और केवल जरूरी संचार के लिए मोबाइल पर निर्भर हैं।
