सूर्य ग्रहण के बाद सिर्फ नहाना काफी नहीं, शुद्धिकरण के लिए अपनाएं ये जरूरी नियम
punjabkesari.in Tuesday, Feb 17, 2026 - 06:25 PM (IST)
नेशनल डेस्क : आज दोपहर 3 बजकर 26 मिनट से सूर्य ग्रहण शुरू हुआ, जो शाम 5:42 तक प्रभावी रहेगा। ग्रहण का पूरा समापन रात 7 बजकर 57 मिनट पर होगा। शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार, ग्रहण समाप्त होते ही शुद्धिकरण और घर-संगठन की प्रक्रिया करना बहुत महत्वपूर्ण है। ऐसा माना जाता है कि ग्रहण के दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है, जो हमारे शरीर और मन पर असर डाल सकती है। ग्रहण के बाद की शुद्धि सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी मानी जाती है।
ग्रहण के बाद स्नान और शुद्धिकरण
सूर्य ग्रहण समाप्त होते ही सबसे पहला कदम पवित्र स्नान करना है। माना जाता है कि ग्रहण के समय निकलने वाली किरणें हमारे शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं। इसे दूर करने के लिए शुद्ध जल से स्नान करना जरूरी है। यदि संभव हो तो स्नान के पानी में गंगाजल या नर्मदा जल मिलाना शुभ माना जाता है। विशेष ध्यान रखें कि गर्भवती महिलाएँ और बुजुर्ग भी ग्रहण के तुरंत बाद स्नान करें। स्नान के बाद साफ और धुले हुए वस्त्र पहनने से शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है। यह प्रक्रिया केवल बाहरी शुद्धि नहीं करती, बल्कि मानसिक रूप से भी शांत और स्थिर बनाती है।
घर और पूजा स्थल की सफाई
स्वयं की शुद्धि के बाद अपने घर और विशेषकर पूजा घर की सफाई करना बेहद जरूरी है। ग्रहण के दौरान पूजा घर के दरवाजे बंद रखे जाते हैं या मूर्तियों को कपड़े से ढक दिया जाता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद पूरे मंदिर और पूजा स्थान में गंगाजल का छिड़काव करना शुभ माना जाता है। घर के कोनों में नमक या गंगाजल के पानी से पोंछा लगाना नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने में मदद करता है। खाने-पीने की चीजों में पहले डाले गए तुलसी के पत्ते या कुशा को बदलकर ताजा भोजन तैयार करना चाहिए। घर की खिड़कियां खोलकर ताजी हवा और सूर्य की किरणें घर में आने दें, जिससे वातावरण और भी सकारात्मक बन सके।
दान और शुभ कार्य
शुद्धिकरण प्रक्रिया के अंतिम चरण में दान करना सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण के बाद किया गया दान सीधे ईश्वर तक पहुंचता है और जीवन के कष्ट कम करने में सहायक होता है। इस समय आप अपनी श्रद्धा के अनुसार गुड़, गेहूं, सफेद वस्त्र या तांबे के बर्तन दान कर सकते हैं। दान करने से न केवल पुण्य मिलता है, बल्कि भीतर दया और करुणा के भाव भी बढ़ते हैं। दान के बाद किसी पवित्र नदी का स्मरण करना या गायत्री मंत्र का एक बार फिर जाप करना शुभ माना जाता है। इस प्रकार ग्रहण के बाद की शुद्धि और दान जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लाने में मदद करता है।
विशेषज्ञों की सलाह
विशेषज्ञ बताते हैं कि ग्रहण के समय वातावरण में बढ़ी नकारात्मक ऊर्जा हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है। इसलिए ग्रहण के बाद स्नान, घर और पूजा स्थल की सफाई तथा दान करना न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी लाभकारी माना जाता है।
