दाल में कालाः नेपाल में चुनाव से पहले अमेरिकी एडमिरल और MI6 की एंट्री, सिर्फ डिप्लोमेसी या कुछ और... ?
punjabkesari.in Thursday, Feb 12, 2026 - 06:32 PM (IST)
International Desk: नेपाल में चुनावी माहौल के बीच अंतर्राष्ट्रीय गतिविधियों ने नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। अमेरिका के इंडो-पैसिफिक कमांड के कमांडर चार-सितारा एडमिरल सैमुअल पापारो गुरुवार को तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर नेपाल पहुंच रहे हैं। नेपाली सेना के सैन्य जनसंपर्क एवं सूचना निदेशालय (DPRIS) ने इसकी पुष्टि की है। एडमिरल सैमुअल का आना कई अटकलों को तेज कर रहा है कि चुनाव से पहले नेपाल में अमेरिकी एडमिरल और MI6 की एंट्री, सिर्फ डिप्लोमेसी है या कुछ और खिचड़ी पक रही है?
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, एडमिरल पापारो के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल विशेष विमान से काठमांडू पहुंचेगा। यात्रा के दौरान वह नेपाल सरकार और नेपाली सेना के शीर्ष अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय वार्ताएं करेंगे। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब नेपाल की घरेलू राजनीति में उथल-पुथल बनी हुई है और चुनावी समीकरणों पर देश-विदेश की नजर है। इससे पहले भी त के पूर्व RAW एजेंट और NSG कमांडो लक्ष्मण उर्फ़लकी बिष्ट ने अपने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर बताया था कि 28 जनवरी 2026 से पोखरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर खड़ा एक प्राइवेट ब्लैक जेट न केवल रहस्य बना हुआ है, बल्कि चौंकाने वाली बात यह है कि नेपाल सरकार के पास इस विमान के आगमन और ठहराव की कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई थी ।
चार-सितारा एडमिरल Samuel Paparo अमेरिका के इंडो-पैसिफिक इलाके के सेना चीफ नेपाल दौरे पर क्यों?
लेकिन बड़ा सवाल ये है…
29 जनवरी को MI6 के एजेंट भी नेपाल की धरती पर आए थे।
नेपाल चुनाव के बीच ये सब क्या सिर्फ आर्मी विज़िट है,
या चुनाव में कोई बड़ा फेरबदल होने वाला है?
जहाँ K. P.… pic.twitter.com/EJAX83Yizg
— Lucky Bisht (@iamluckybisht) February 12, 2026
जानकारी के अनुसार एडमिरल पापारो पांचखाल स्थित नेपाली सेना के वीरेंद्र शांति कार्य प्रशिक्षण केंद्र का भी निरीक्षण करेंगे। यह केंद्र संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों के लिए नेपाली सैनिकों के प्रशिक्षण का प्रमुख संस्थान माना जाता है। नेपाल और अमेरिका के बीच दशकों पुराने द्विपक्षीय संबंधों के संदर्भ में इस यात्रा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच सहयोग विशेष रूप से मानवीय सहायता, आपदा प्रबंधन, क्षमता निर्माण और वैश्विक शांति स्थापना जैसे साझा हितों के क्षेत्रों में केंद्रित रहा है। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब क्षेत्रीय सुरक्षा, चीन की बढ़ती सक्रियता और भारत-प्रशांत रणनीति वैश्विक विमर्श का केंद्र बनी हुई है। अमेरिकी पक्ष की ओर से आधिकारिक तौर पर इस यात्रा को सैन्य सहयोग, आपदा-प्रबंधन, प्रशिक्षण और क्षेत्रीय सुरक्षा संवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। नेपाल लंबे समय से अमेरिका के साथ सैन्य अभ्यास और मानवीय सहयोग कार्यक्रमों में भाग लेता रहा है। हालांकि चर्चाओं को और हवा तब मिली, जब 29 जनवरी को ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी MI6 से जुड़े अधिकारियों की नेपाल यात्रा की खबरें सामने आईं।
यह वही पोखरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, जिसे चीन की मदद से बनाया गया और जिस पर तकनीकी, ऑपरेशनल और सुरक्षा स्तर पर बीजिंग के प्रभाव को लेकर पहले से ही विवाद रहा है। ऐसे एयरपोर्ट पर एक अज्ञात जेट का हफ्तों तक खड़ा रहना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या ये यात्राएं सिर्फ औपचारिक और कूटनीतिक हैं, या फिर इनके पीछे कोई रणनीतिक पुनर्संतुलन छिपा है। खासकर तब, जब पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली और काठमांडू के मेयर बालेन शाह पहले से ही राजनीतिक बहसों के केंद्र में हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नेपाल की भौगोलिक स्थिति उसे स्वाभाविक रूप से वैश्विक शक्तियों के लिए महत्वपूर्ण बनाती है, लेकिन हर हाई-लेवल विज़िट को चुनावी हस्तक्षेप से जोड़कर देखना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।
