सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासाः अमेरिकी की ईरान पर हमले की फुल तैयारी ! मिडल ईस्ट में लड़ाकू विमान और टैंकर तैनात

punjabkesari.in Wednesday, Feb 11, 2026 - 05:28 PM (IST)

Washington: मिडल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंचता दिख रहा है। सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि अमेरिका ने कतर, जॉर्डन और सऊदी अरब में स्थित अपने प्रमुख सैन्य अड्डों पर लड़ाकू विमानों, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और मिसाइल डिफेंस सिस्टम की संख्या तेज़ी से बढ़ा दी है। विशेषज्ञ इसे ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर संभावित हमले या ईरान की जवाबी कार्रवाई से बचाव की तैयारी मान रहे हैं। प्लैनेट लैब्स और रॉयटर्स द्वारा जारी तस्वीरों में जनवरी से फरवरी 2026 के बीच अमेरिकी अड्डों पर बड़े बदलाव साफ दिखाई दे रहे हैं। यह सैन्य गतिविधि ऐसे समय में बढ़ी है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को नई न्यूक्लियर डील के लिए दबाव बना रहे हैं।

 

अल उदेद एयर बेस, कतर
कतर के दोहा स्थित अल उदेद एयर बेस, जो अमेरिकी सेंट्रल कमांड का मुख्यालय है, वहां 17 जनवरी से 1 फरवरी के बीच विमानों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है। यहां मोबाइल पैट्रियट मिसाइल लॉन्चर्स भी तैनात किए गए हैं, जिनका मकसद ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों से बचाव बताया जा रहा है। अल उदेद वही बेस है, जिस पर पहले भी ईरान जवाबी हमले कर चुका है।

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मुवाफक साल्टी एयर बेस, जॉर्डन
जॉर्डन के मुवाफक साल्टी एयर बेस पर 25 जनवरी से 2 फरवरी के बीच दर्जनों F-15E फाइटर जेट्स, A-10 ग्राउंड अटैक एयरक्राफ्ट और MQ-9 रीपर ड्रोन पहुंचाए गए हैं। यह बेस ईरान के अपेक्षाकृत करीब है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।

 

प्रिंस सुल्तान एयर बेस, सऊदी अरब
सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर C-5 गैलेक्सी और C-17 ग्लोबमास्टर जैसे भारी ट्रांसपोर्ट विमान देखे गए हैं, जिनका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर हथियार, मिसाइल सिस्टम और सैन्य साजो-सामान ढोने में किया जाता है। इसके अलावा ओमान और डिएगो गार्सिया जैसे रणनीतिक ठिकानों पर भी अमेरिकी विमानों की मौजूदगी बढ़ने के संकेत मिले हैं। कुल मिलाकर फाइटर जेट्स, टैंकर और एयर डिफेंस सिस्टम की तैनाती में तेज़ी आई है।

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ट्रंप की चेतावनी और ईरान की तैयारी
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ईरान से परमाणु समझौता चाहते हैं, लेकिन साथ ही उसके बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर भी रोक की मांग कर रहे हैं। ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता का मामला बताते हुए साफ इनकार कर दिया है। ट्रंप पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि अगर डील नहीं हुई तो अगला हमला “बहुत बुरा” होगा।उधर, ईरान भी संभावित हमले की आशंका को देखते हुए अपनी परमाणु साइट्स को मजबूत कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान इस्फहान जैसे ठिकानों पर टनलों को मिट्टी से ढक रहा है और संरचनाओं को और सुरक्षित बना रहा है।

 

विशेषज्ञों की राय

  • विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी महंगी और व्यापक सैन्य तैनाती सिर्फ अभ्यास नहीं हो सकती।
  • यह ईरान पर हमले की सीधी तैयारी हो सकती है।
  • या फिर ईरान की जवाबी मिसाइलों से बचाव की रणनीति।
  • साथ ही, इसे कूटनीति में दबाव बनाने की रणनीति भी माना जा रहा है।

 

हालांकि बातचीत के रास्ते खुले हैं, लेकिन दोनों पक्षों की सैन्य तैयारियां यह संकेत दे रही हैं कि हालात बेहद नाज़ुक हैं। अगर हमला हुआ तो यह पूरे मध्य पूर्व को क्षेत्रीय युद्ध की आग में झोंक सकता है।
 


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Content Writer

Tanuja

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