महाशिवरात्री पर भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना महादेव हो सकते हैं नाराज
punjabkesari.in Sunday, Feb 08, 2026 - 03:55 PM (IST)
नेशनल डेस्क : फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाने वाला महाशिवरात्रि का पर्व केवल उपवास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाएगी। इस दिन देशभर में शिवालयों में विशेष पूजा, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक किए जाते हैं। मान्यता है कि महाशिवरात्रि पर सच्चे मन से की गई आराधना से भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है और दांपत्य जीवन सुखमय रहता है।
इस बार की महाशिवरात्रि को ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है। पंचांग गणनाओं के अनुसार, इस दिन कई दुर्लभ और प्रभावशाली योग बन रहे हैं, जिससे इस पर्व का महत्व और बढ़ गया है। ऐसे में शिवभक्तों के लिए यह जानना जरूरी है कि महाशिवरात्रि पर भगवान शिव को क्या अर्पित करना शुभ होता है और किन चीजों से परहेज करना चाहिए।
महाशिवरात्रि पर शिव पूजा में इन बातों का रखें ध्यान
- शिवलिंग की पूजा सामान्य देवी-देवताओं की मूर्तियों से अलग मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिव पूजा में शंख बजाना या शंख से जल अर्पित करना वर्जित है। पौराणिक कथाओं में शंख की उत्पत्ति असुर शंखचूड़ से जुड़ी बताई गई है, जिनका वध भगवान शिव ने किया था, इसी कारण शिव पूजा में शंख का प्रयोग नहीं किया जाता।
- भगवान शिव को वैराग्य का प्रतीक माना गया है, इसलिए शिवलिंग पर हल्दी, कुमकुम या सिंदूर अर्पित नहीं करना चाहिए। हालांकि, माता पार्वती की पूजा में इन पदार्थों का उपयोग शुभ माना जाता है।
- बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है, लेकिन ध्यान रखें कि बेलपत्र कटा-फटा या टूटा हुआ न हो। शास्त्रों के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन तीन पत्तों वाला स्वच्छ और अखंड बेलपत्र चढ़ाना विशेष फलदायी माना जाता है।
- कुछ फूल और पत्तियां भी शिवलिंग पर अर्पित नहीं की जातीं। केतकी, कनेर, कमल और तुलसी के पत्ते शिव पूजा में वर्जित माने गए हैं। इनके स्थान पर बेलपत्र, धतूरा, भांग और शमी पत्र चढ़ाना शुभ होता है।
- इसके अलावा, महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर टूटे हुए चावल यानी खंडित अक्षत नहीं चढ़ाने चाहिए। भगवान शिव को अर्पित किए जाने वाले अक्षत पूर्ण, स्वच्छ और साबुत होने चाहिए।
