RSS प्रमुख मोहन भागवत की एंट्री पर रोक की मांग, 2 कनाडाई सांसद ने लिखा पत्र
punjabkesari.in Saturday, Aug 08, 2026 - 04:16 PM (IST)
भारत और कनाडा के रिश्तों में एक बार फिर तनाव बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है। कनाडा की विपक्षी न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (NDP) की दो सांसदों ने अपनी सरकार से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर प्रतिबंध लगाने और संघ प्रमुख मोहन भागवत को कनाडा में प्रवेश की अनुमति नहीं देने की मांग की है। NDP की विदेश मामलों की प्रवक्ता हीथर मैकफरसन और इमिग्रेशन एवं पब्लिक सेफ्टी मामलों की प्रवक्ता जेनी क्वान ने कनाडा की विदेश मंत्री, पब्लिक सेफ्टी मंत्री और इमिग्रेशन मंत्री को पत्र लिखकर इस संबंध में कार्रवाई की मांग की है। दोनों सांसदों ने यह अपील भागवत की अगस्त के अंत में प्रस्तावित कनाडा यात्रा से पहले की है।
RSS को लेकर NDP सांसदों ने लगाए गंभीर आरोप
पत्र में RSS को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हीथर मैकफरसन ने RSS को एक चरमपंथी संगठन बताते हुए दावा किया कि यह भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों और हाशिए पर रहने वाले लोगों के खिलाफ नफरत और हिंसा को बढ़ावा देता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कनाडा में RSS के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को डराया-धमकाया जाता है। NDP सांसदों का कहना है कि कनाडा में रहने वाले कुछ अल्पसंख्यक समुदायों को संगठन की मौजूदगी को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं हैं। हालांकि, ये NDP सांसदों द्वारा लगाए गए आरोप और राजनीतिक मांगें हैं। कनाडा सरकार की ओर से RSS पर प्रतिबंध या मोहन भागवत के प्रस्तावित दौरे को लेकर किसी अंतिम निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है।
मोहन भागवत का अगस्त के अंत में प्रस्तावित दौरा
खबर है कि डॉ मोहन भागवत का कनाडा दौरा 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच प्रस्तावित है। इसी यात्रा को ध्यान में रखते हुए NDP सांसदों ने कनाडा सरकार से पहले ही निर्णय लेने की अपील की है। कनाडाई सांसदों का कहना है कि सरकार को यह आकलन करना चाहिए कि RSS की गतिविधियों से कनाडा में रहने वाले समुदायों की सुरक्षा पर कोई खतरा तो नहीं है और यदि सरकार को जोखिम नजर आता है तो उसे आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
भारत-कनाडा रिश्तों के लिए संवेदनशील मुद्दा
RSS पर प्रतिबंध और उसके प्रमुख को कनाडा में प्रवेश से रोकने की मांग ऐसे समय सामने आई है, जब भारत और कनाडा के बीच संबंध पहले से ही कई संवेदनशील मुद्दों से प्रभावित रहे हैं। ऐसे में किसी बड़े भारतीय सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन और उसके प्रमुख को लेकर कनाडा में उठी यह मांग दोनों देशों के बीच राजनीतिक चर्चा को फिर गर्म कर सकती है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि कनाडा सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है। क्या सरकार NDP सांसदों की मांग पर कोई औपचारिक कार्रवाई करेगी या मोहन भागवत की प्रस्तावित यात्रा सामान्य रूप से आगे बढ़ेगी।
