’10 मिनट तक तड़पता रहा मेरा बेटा…’ द्वारका हिट एंड रन में मां का छलका दर्द, रो-रो कर मांग रही मदद
punjabkesari.in Tuesday, Feb 17, 2026 - 01:04 PM (IST)
नेशनल डेस्क: दिल्ली के पॉश इलाके द्वारका से एक ऐसी दर्दनाक खबर सामने आई है, जिसने रईसजादों की बेलगाम रफ्तार और सिस्टम की खामियों को फिर से कटघरे में खड़ा कर दिया है। एक सिंगल मदर ने 23 साल तक जिस बेटे को बड़े अरमानों से पाल-पोसकर बड़ा किया, उसे एक नाबालिग की लापरवाही ने चंद सेकंडों में मौत की नींद सुला दिया।
द्वारका हिट-एंड-रन: 13 चालान वाली SUV और बिना लाइसेंस का नाबालिग, मां ने खोया इकलौता सहारा
द्वारका की सड़कों पर रील बनाने और तेज रफ्तार के शौक ने एक हंसते-खेलते परिवार को ताउम्र का गम दे दिया है। 23 वर्षीय साहिल धनशेरा की मौत ने पूरी दिल्ली को झकझोर कर रख दिया है। साहिल की मां, इन्ना माकन का आरोप है कि हादसे के बाद उनका बेटा करीब 10 मिनट तक सड़क पर तड़पता रहा और मदद की गुहार लगाता रहा, लेकिन वहां मौजूद भीड़ और एंबुलेंस तमाशबीन बनी रही। जब तक मां मौके पर पहुंची और उसे अस्पताल ले जाया गया, तब तक साहिल की सांसें थम चुकी थीं।
I lost my son sahil Dhaneshra a 22+ year old young and most talented boy whom I raised for 23 years alone as a single mom ,was killed brutally by a scorpio N bearing no.UP57BM3057 driver is an unlicensed driver and his sister while making speed fun reels in #dwarka #delhipolice pic.twitter.com/RiAx6HkO6x
— Inna Makan (@inna_makan) February 14, 2026
नियमों को ठेंगा दिखाती 'किलर' स्कॉर्पियो
जांच में इस हादसे में शामिल SUV (Scorpio-N) को लेकर जो खुलासे हुए हैं, वे बेहद डराने वाले हैं। जिस गाड़ी ने साहिल को कुचला, उस पर पहले से ही ओवरस्पीडिंग के 13 चालान दर्ज थे। दिल्ली और उत्तर प्रदेश में लगातार नियमों का उल्लंघन करने के बावजूद यह गाड़ी सड़क पर बेखौफ दौड़ रही थी। हादसे के वक्त गाड़ी कोई वयस्क नहीं, बल्कि एक नाबालिग चला रहा था, जिसके पास न तो लाइसेंस था और न ही सड़क पर गाड़ी उतारने की समझ। बताया जा रहा है कि गाड़ी चलाने के दौरान सोशल मीडिया के लिए रील भी बनाई जा रही थी।
न्याय की गुहार और कानून की विडंबना
साहिल की मां का दर्द तब और बढ़ गया जब उन्हें पता चला कि जिस आरोपी ने उनके बेटे की जान ली, उसे बोर्ड परीक्षाओं का हवाला देकर अंतरिम जमानत मिल गई है। एक तरफ मां अपने इकलौते बेटे की चिता की राख समेट रही थी, तो दूसरी तरफ आरोपी कानून की गलियों से बाहर निकल आया। अब पीड़ित परिवार सोशल मीडिया और पुलिस प्रशासन से सिर्फ एक ही मांग कर रहा है—कड़ी सजा और निष्पक्ष न्याय। यह मामला एक बार फिर यह सवाल उठाता है कि आखिर कब तक रईसजादों की ऐसी लापरवाही बेगुनाहों की जान लेती रहेगी?
