कोरोना का सितम: कोई रिक्शा तो कोई पैदल ही निकल पड़ा अपने गांव के लिए

2020-03-26T10:34:33.287

नेशनल डेस्कः कोरोना वायरस की रफ्तार को रोकने के लिए देश में 21 दिन का लॉकडाउन किया गया है। कोरोना वायरस ने जिंदगी को लगभग थाम- सा दिया है, लोग घरों में बंद हैं। देशभर में फैक्ट्रियां बंद हैं, रोजगार ठप्प हो गया है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट, रेल और हवाई सफर सब बंद है। इन सबके बीच सबसे ज्यादा मुश्किलों का सामना दिहाड़ीदार मजदूरों को करना पड़ रहा है जो रोज कमाते थे और घर पर राशन पानी आता था। वहीं कई दिहाड़ी वाले अब अपने गांवों में लौटने को मजबूर हो रहे हैं। लॉकडाउन के चलते कोई पैदल ही अपने गांव जा रहा है तो कोई रिक्शे से निकल पड़ा है। ऐसी कई तस्वीरें सामनेे  आई हैं। एक परिवार तीन रिक्शों पर सवार होकर दिल्ली से अपने गांव बिहार के मोतिहारी के लिए रवाना हुआ। तीन रिक्शों में घर का कुछ सामान, कुछ बर्तन और सदस्य हैं।

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वहीं दूसरी तरफ दिल्ली से ही उत्तर प्रदेश के हापुड़ के लिए कुछ लोग पैदल ही नकल लिए। सिर और कंधों पर लदे बैग लेकर कुछ लड़के जब दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर पहुंचे तो पुलिस ने उनको रोका और पूछा कि किधर से आ रहे हो और कहां जा रहे हो। तब युवकों ने बताया कि वे लोग हापुड़ अपने गांव जा रहे हैं। इस पर पुलिस ने कहा कि रेल और कोई गाड़ी तो चल नहीं रही तो कैसे जाओगे। लड़कों ने जवाब दिया कि ऐसे ही पैदल निकल जाएंगे। युवकों ने बताया कि वो लोग दिहाड़ी करते हैं और उनके पास ज्यादा पैसा नहीं बचा है कि खाने का सामान या किराया दोनों भर पाएं इसलिए अपने गांव वापिस लौट रहे हैं। यह सुनकर पुलिस को भी रहम आया तो अधिकारी ने पूछा कि कुछ खाने के लिए है पास में तो लड़कों ने जवाब दिया हां है,  पर पानी खत्म हो गया है।

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ऐसे में पुलिस अधिकारी ने अपने पास पड़े पानी के बड़े कैन को अंदर से भरा और लड़कों को देकर बोले जाओ। कोरोना अमीर या गरीब के लिए नहीं है यह सब पर अपना कहर दिखा रहा है। कोरोना की वजह से काम-धंधे सब ठप्प हो गए हैं। दिहाड़ी करने वालों का कहना है कि अगर अपने घरों में नहीं लौटे तो सड़कों पर आ जाएंगे क्योंकि कई मकान मालिक सहयोग नहीं कर रहे और ऐसे में कोरोना से पहले भूख  से मर जाएंगे।

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Seema Sharma

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