अकाल तख्त में कांग्रेस की एंट्री पर गरमाई सियासत, आर.पी. सिंह बोले- दशकों बाद बदला रुख
punjabkesari.in Tuesday, Jun 30, 2026 - 06:23 PM (IST)
नेशनल डेस्क: भाजपा नेता आर.पी. सिंह ने एक ट्वीट (अब 'एक्स') के जरिए अमृतसर स्थित श्री अकाल तख्त साहिब में बेअदबी विरोधी विधेयक के मुद्दे पर कांग्रेस विधायकों की उपस्थिति को सिख राजनीति और इतिहास के लिहाज से एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटनाक्रम बताया है। सिंह ने इसे कांग्रेस और सिख संस्थाओं के बीच दशकों पुराने तनावपूर्ण संबंधों में एक बड़े बदलाव के रूप में रेखांकित किया है।
आर.पी. सिंह ने ट्वीट कर कहा- "कल पहली बार सिख कौम ने कांग्रेस के विधायकों को श्री अकाल तख्त साहिब की कचहरी में बेअदबी विरोधी विधेयक के मुद्दे पर सामूहिक रूप से धैर्य, गरिमा और सम्मान के साथ सुना जाता हुआ देखा।"
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Yesterday, for the first time, the Sikh Kaum witnessed @INCIndia legislators being heard collectively at Sri Akal Takht Sahib with patience, dignity, and respect on the anti-sacrilege legislation.
— RP Singh National Spokesperson BJP (@rpsinghkhalsa) June 30, 2026
Given the Congress party's long and deeply contentious relationship with Sikh… pic.twitter.com/j7D5KFDFk9
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ऐतिहासिक कड़वाहट और अकाल तख्त के रुख में बदलाव राजनीतिक विश्लेषकों और आर.पी. सिंह के अनुसार, कांग्रेस पार्टी और सिख धार्मिक संस्थाओं के बीच का इतिहास बेहद विवादास्पद और कड़वाहट भरा रहा है। ऐसे में अकाल तख्त साहिब द्वारा कांग्रेस विधायकों को सुनना और उनके पक्ष को धैर्यपूर्वक स्वीकार करना, अकाल तख्त के पारंपरिक कड़े रुख से एक बड़ा विचलन (शिफ्ट) माना जा रहा है।
आर.पी. सिंह ने इस घटनाक्रम को "सिख इतिहास के एक नए अध्याय की शुरुआत" के रूप में परिभाषित किया है। उन्होंने संकेत दिया कि सिख धर्मगुरु अब उस राजनीतिक दल के साथ मेल-मिलाप की दिशा में बढ़ते दिखाई दे रहे हैं, जिसे सिख समुदाय कई ऐतिहासिक त्रासदियों के लिए नैतिक और राजनीतिक रूप से जिम्मेदार मानता आया है।
इन मुद्दों पर कांग्रेस रही निशाने पर
आर.पी. सिंह ने अपने लेख में उन गहरे जख्मों का जिक्र किया, जिनके लिए सिख समाज कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराता है:
ऑपरेशन ब्लू स्टार: जून 1984 में स्वर्ण मंदिर परिसर में सैन्य कार्रवाई।
श्री अकाल तख्त साहिब को नुकसान: सैन्य कार्रवाई के दौरान सिख धर्म के सर्वोच्च सर्वोच्च पीठ को पहुंची क्षति।
1984 का सिख-विरोधी नरसंहार: पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली (जहाँ लगभग 3,000 सिख मारे गए) और देश के अन्य हिस्सों में हुआ कत्लेआम।
पंजाब में उग्रवाद का दौर: आतंकवाद और उसके खिलाफ चली पुलिसिया/सैन्य कार्रवाई के दौरान हजारों बेगुनाह लोगों की मौत।
भाई गुरदेव सिंह कौंके प्रकरण: पूर्व जत्थेदार भाई गुरदेव सिंह कौंके की पुलिस हिरासत में हुई संदिग्ध मृत्यु।
