अधूरी रह गई 'शांभवी' की ऊंची उड़ान: बारामती प्लेन क्रैश में को-पायलट की भी मौत, याद कर फूट-फूटकर रो पड़े रिश्तेदार
punjabkesari.in Thursday, Jan 29, 2026 - 11:42 AM (IST)
नेशनल डेस्क। "सितारों से आगे जहां और भी हैं..." लेकिन दिल्ली की बेटी शांभवी पाठक के लिए यह उड़ान आखिरी साबित हुई। महाराष्ट्र के बारामती में हुए दर्दनाक विमान हादसे में उपमुख्यमंत्री अजित पवार के साथ-साथ जांबाज को-पायलट शांभवी पाठक ने भी अपनी जान गंवा दी। इस खबर के बाद दिल्ली के सफदरजंग एन्क्लेव स्थित उनके घर पर सन्नाटा पसरा है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। शांभवी के सपनों और उनके सफर की पूरी कहानी यहां पढ़ें:
सपनों को पंख देने वाली बेटी का दुखद अंत
शांभवी पाठक के सपने बचपन से ही आसमान छूने के थे। दिल्ली के एयर फोर्स बाल भारती स्कूल से शुरुआती शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने पायलट बनने का संकल्प लिया। अपने सपनों को पूरा करने के लिए शांभवी न्यूजीलैंड गईं जहां उन्होंने कमर्शियल पायलट की कड़ी ट्रेनिंग ली। भारत लौटने के बाद उन्होंने मध्य प्रदेश के फ्लाइंग क्लब में काम किया और अपनी मेहनत के दम पर चार्टर्ड प्लेन उड़ाने तक का सफर तय किया।
दिल्ली वाले घर में छाई खामोशी
सफदरजंग एन्क्लेव के ए-ब्लॉक में शांभवी का परिवार हाल ही में एक नई इमारत में शिफ्ट हुआ था। पड़ोसी बताते हैं कि अभी तो घर में ठीक से पर्दे और गमले भी नहीं लग पाए थे कि यह मनहूस खबर आ गई। घर के पास रहने वाले लोगों और गार्ड्स का कहना है कि शांभवी और उनका परिवार बहुत ही शालीन था। शांभवी अक्सर अपने फौजी पिता के साथ देखी जाती थीं। शांभवी की मां की सहेलियों ने बताया कि वह अपनी ड्यूटी को लेकर इतनी समर्पित थीं कि पिछले काफी समय से व्यस्तता के कारण पड़ोसियों से भी उनकी मुलाकात कम हो पाती थी।
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कैप्टन सुमित कपूर और शांभवी की आखिरी उड़ान
बुधवार को बारामती रनवे पर लैंडिंग के दौरान जो हादसा हुआ उसमें विमान को कैप्टन सुमित कपूर मुख्य पायलट के तौर पर और शांभवी पाठक को-पायलट के तौर पर ऑपरेट कर रही थीं। खराब मौसम और तकनीकी खराबी के बीच दोनों ने विमान को संभालने की कोशिश की लेकिन हादसे ने किसी को मौका नहीं दिया।
महाराष्ट्र की राजनीति का बड़ा नुकसान
इस हादसे में न केवल एक होनहार पायलट और क्रू मेंबर की जान गई बल्कि महाराष्ट्र ने अपने कद्दावर नेता अजित पवार को भी खो दिया। बारामती के जिस रनवे पर वे उतरने वाले थे वहां अब केवल विमान के मलबे और यादें शेष हैं।



