BJP उन राज्यों में भी जीत रही है जहां वह ''मोदी लहर'' के चरम पर भी नहीं जीत पाई थी: CJP के अभिजीत दिपके ने SIR विवाद पर नया दावा किया
punjabkesari.in Monday, Oct 05, 2026 - 09:24 AM (IST)
पुणे : भारतीय जनता पार्टी (BJP) की लगातार जीत पर तीखा कटाक्ष करते हुए, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया है कि सत्ताधारी पार्टी उन राज्यों में भी जीत हासिल कर रही है जहां वह "मोदी लहर" के चरम पर भी नहीं जीत पाई थी। उन्होंने इन नतीजों के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के तहत कथित संस्थागत हेरफेर को जिम्मेदार ठहराया।
दिपके ने रविवार को पत्रकारों से कहा, "BJP उन राज्यों में जीत रही है जहां वह 'मोदी लहर' के चरम पर भी जीत हासिल नहीं कर पाई थी-और ऐसा ज्ञानेश कुमार की वजह से हो रहा है। जब ज्ञानेश कुमार हट जाएंगे और SIR (सिस्टम-जनरेटेड रिपोर्ट) फ्रीज हो जाएगी, तभी हमें पता चलेगा कि BJP असल में कितनी सीटें जीतती है।" CEC से पद छोड़ने का आग्रह करते हुए, दिपके ने दावा किया कि देश में चुनाव के नतीजे "पहले से तय" हो गए हैं, जिससे चुनाव में भाग लेना बेमानी हो गया है।
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते और स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित नहीं करते, तब तक ऐसे चुनावों में भाग लेने का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि विजेता पहले से ही तय होता है।" दिपके ने ये बातें पुणे के दौरे के दौरान कहीं, जहां वे महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षा में कथित अनियमितताओं और भर्ती में देरी को लेकर महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ विरोध कर रहे छात्रों के समर्थन में पहुंचे थे।
चुनाव विवाद को सत्ताधारी सरकार की प्रशासनिक विफलताओं से जोड़ते हुए, दिपके ने आरोप लगाया कि प्रतियोगी परीक्षाओं और चुनावी प्रक्रियाओं, दोनों में ही जनता का भरोसा खत्म हो गया है। MPSC चेयरमैन के इस्तीफ़े की मांग करते हुए दिपके ने कहा, "मैं यहां विरोध कर रहे छात्रों से मिलने आया हूं। उनका भविष्य खतरे में है क्योंकि लगातार पेपर लीक के मामले सामने आ रहे हैं। सरकार इन लीक को लेकर गंभीर नहीं है। CJP उनकी मांगों का समर्थन करता है और जब तक MPSC चेयरमैन इस्तीफ़ा नहीं देते, यह विरोध जारी रहेगा।"
दिपके का यह बयान 'द इंडियन एक्सप्रेस' की उस रिपोर्ट के बाद चल रहे विवाद के बीच आया है, जिसमें कहा गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनावी रोल, वोटर रजिस्ट्रेशन और आयोग के टेक्नोलॉजी सिस्टम से जुड़े फ़ैसलों पर औपचारिक रूप से आपत्ति जताई थी।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इस बात को खारिज कर दिया कि बताई गई आपत्तियां अंतिम फ़ैसलों पर संस्थागत असहमति थीं। चुनाव आयोग ने कहा कि ड्राफ्ट स्टेज के दौरान उठाए गए ऑपरेशनल सवाल, इनपुट और सुझाव उसकी स्टैंडर्ड एडमिनिस्ट्रेटिव और फ़ैसला लेने की प्रक्रिया का हिस्सा थे। ECI ने कहा कि SIR प्रक्रिया के शेड्यूल से जुड़े फ़ैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।
