मुंबई और निकटवर्ती क्षेत्रों में बस सेवाएं हुईं प्रभावित, दुकानें भी रही बंद

10/11/2021 4:58:44 PM

नेशनल डेस्क: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में हिंसा में चार किसानों की मौत के विरोध में महा विकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार के तीन सहयोगी दलों के आह्वान पर महाराष्ट्र में आहूत बंद के चलते मुंबई और अन्य हिस्सों में सोमवार को अधिकतर दुकानें एवं वाणिज्यिक संस्थान बंद रहे और बस सेवाएं प्रभावित हुईं। सत्तारूढ़ गठबंधन के तीन सहयोगियों -- शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और कांग्रेस ने लखीमपुर खीरी घटना के विरोध में प्रदर्शन किया। शिवसेना सांसद संजय राउत ने दावा किया कि यह बंद ‘शत प्रतिशत' सफल रहा।

विपक्षी भाजपा ने कहा कि यह राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित बंद था और अवांछनीय था। महाराष्ट्र के जल संसाधन मंत्री एवं राकांपा नेता जयंत पाटिल ने बताया कि आधी रात को बंद की शुरुआत हुई थी और उससे सरकार का कोई लेना-देना नहीं था, उसे सत्तारूढ़ दलों ने आहूत किया था। उन्होंने यह भी कहा कि इस बंद में जरूरी सेवाएं शामिल नहीं थीं। सत्तारूढ़ गठबंधन के तीनों घटक दलों ने लोगों से अपील की है कि वे किसानों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए बंद का पूरा समर्थन करें। बृहन्मुंबई विद्युत आपूर्ति एवं परिवहन (बेस्ट) की बसों और कई पारंपरिक ‘काली-पीली कैब' के सड़कों से नदारद रहने के कारण लोकल ट्रेनों से यात्रा करने के लिए उपनगरीय रेलवे स्टेशनों पर भारी भीड़ बढ़ गई। लोकल ट्रेनें अपने निर्धारित समयानुसार चल रही हैं।

मुंबई में आवश्यक वस्तुओं की बिक्री करने वाली दुकानों के अलावा अन्य दुकानें और वाणिज्यिक प्रतिष्ठान बंद रहे। अधिकारियों ने बताया कि महाराष्ट्र बंद के दौरान यहां कुछ स्थानों पर पथराव की घटनाओं के बाद बेस्ट बस सेवाएं सोमवार को मुंबई में बंद कर दी गईं। बेस्ट के एक बयान के अनुसार तड़के धारावी, मानखुर्द, शिवाजी नगर, चारकोप, ओशिवरा, देवनार और इनऑर्बिट मॉल के पास नौ बसें क्षतिग्रस्त हो गईं, जिनमें पट्टे पर किराए पर ली गई एक बस शामिल है। बयान में कहा गया है, ‘‘बेस्ट प्रशासन ने पुलिस सुरक्षा की मांग की है और स्थिति की समीक्षा के बाद सभी डिपो से बसों का संचालन किया जाएगा।'' मुंबई की जीवन रेखा समझी जाने वाली स्थानीय ट्रेनें सामान्य रूप से चल रही हैं लेकिन वे खचाखच भरी नजर आयीं क्योंकि यात्रियों ने साधन नहीं मिलने पर ट्रेनों की ओर रूख किया।

इस बीच, मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिवाजी सुतार ने ‘पीटीआई भाषा' से कहा, ‘‘हमारी सेवाएं निर्धारित समयानुसार संचालित हो रही हैं।'' ट्रासंपोर्ट यूनियन के नेताओं के अनुसार यहां ज्यादातर काले एवं पीले कैब सड़कों पर नजर नहीं आये। ‘मुंबई टैक्सीमेंस यूनियन' के महासचिव ए एल क्वाड्रोस ने कहा, ‘‘काली-पीली टैक्सियां चल रही हैं, लेकिन उनकी संख्या बहुत कम है। शहर के हवाई अड्डे के बाहर टैक्सी संचालन प्रभावित नहीं हुई है।'' शहर में मेट्रो रेल सेवाएं भी सामान्य रूप से चल रही हैं। महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एमएसआरटीसी) के अधिकारियों ने बताया कि मुंबई से अन्य स्थानों के लिए उसकी बसें निर्धारित समय के अनुसार चल रही हैं और कहीं भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।

शहर में बंद के मद्देनजर बड़ी संख्या में पुलिस बलों को तैनात किया गया है। इससे अलावा अतिरिक्त यातायात पुलिसकर्मी भी तैनात किए गए हैं। राज्य के जल संसाधन मंत्री ने कहा कि बंद अबतक शांतिपूर्ण है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘ सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं है। तीन दलों ने बंद का आह्वान किया है। हमने बंद का आह्वान किया है और राज्य के लोग भी भाजपा सरकार से परेशान हैं। इसलिए वे हमारा साथ दे रहे हैं।'' पाटिल ने अपनी पार्टी के सहयोगियों नवाब मलिक, सांसद सुप्रिया सुले और अन्य साथ दक्षिण मुंबई के हुतात्मका चौक पर प्रदर्शन किया। उनके हाथों में तख्तियां थीं और उन्होंने लखीमपुर खीरी में किसानों की मौत को लेकर केंद्र एवं उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

उधर राउत ने कहा, ‘‘ हमें जो रिपोर्ट मिली है, उसके अनुसार बंद शत प्रतिशत सफल रहा। लोगों ने पूरे मन से बंद का समर्थन किया।'' बंद के दौरान हिंसा की खबरों पर राउत ने कहा, ‘‘ दुनियाभर में विरोध प्रदर्शन के दौरान ऐसी मामूली घटनाएं होती रहती हैं। शिवसेना सांसद ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग विरोध प्रदर्शन पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें स्वयं से पूछना चाहिए कि क्या वे इस देश के नागरिक हैं और क्या वे किसानों के प्रति ऋणी नहीं हैं। राउत ने कहा, ‘‘ यह राजनीतिक बंद नहीं है। यह किसानों के समर्थन में बुलाया गया बंद है। '' प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि सभी ने पूरी ताकत से बंद में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि व्यापारी ‘गब्बर सिंह टैक्स ' (जीएसटी) के दमन के विरोध स्वरूप बंद में हिस्सा ले रहे हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के समर्थन में दृढ़ता से खड़ी है और यदि उनकी मदद के लिए ऋण लेने की स्थिति उत्पन्न हुई तो वह ऐसा करने से नहीं हिचकेगी। सत्ताधारी गठबंधन सहयोगी दलों के कार्यकर्ताओं ने पोस्टर और बैनर लेकर ठाणे शहर, नवी मुंबई, कल्याण और वसई में मोर्चे निकाले और लखीमपुर खीरी में हुई किसानों की हत्या के विरोध में नारे लगाए। स्थानीय नेताओं को कारोबारियों से अपनी दुकानें बंद रखने का अनुरोध करते देखा गया। ‘ठाणे स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन' ने एक विज्ञप्ति जारी कर किसानों की हत्या किए जाने की निंदा की, लेकिन साथ ही कहा कि उद्योग एवं छोटे व्यापारी बंद के पक्ष में नहीं हैं, क्योंकि वे कोविड-19 से संबंधित प्रतिबंधों के कारण पहले ही काफी नुकसान झेल चुके हैं। भाजपा के विधानपरिषद सदस्य निरंजन दावाखारे एवं विधायक संजय केलकर ने दावा किया कि यह ‘एमवीए सरकार प्रायोजित बंद' है जो भाजपा केा बदनाम करने के लिए सत्तारूढ़ दलों द्वारा उठाया गया कदम है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की सरकार वहां की स्थिति संभालने में सक्षम है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बस मृत किसानों के परिवारों के प्रति ‘खानापूरी करने वाली सहानुभूति भर है, बंद का असली कारण एमवीए नेताओं पर चल रही छापेमारी है।

 


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Content Editor

Hitesh

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