Swiggy, Zomato और Blinkit के डिलीवरी बॉय्स के लिए बड़ी खुशखबरी, अब इन Gig Workers को भी मिलेगी पेंशन
punjabkesari.in Thursday, Aug 13, 2026 - 09:37 AM (IST)
नई दिल्ली : Zomato, Swiggy, Blinkit और अन्य ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले लाखों डिलीवरी पार्टनर्स और गिग वर्कर्स के लिए खुशखबरी वाली खबर है। अब गिग वर्कर्स भी अपने भविष्य और बुढ़ापे को सुरक्षित करने के लिए 'नेशनल पेंशन सिस्टम' (NPS) के जरिए रिटायरमेंट फंड बना सकेंगे।
पेंशन फंड नियामक PFRDA ने गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से 'NPS e-Shramik' मॉडल पेश किया है जिसके तहत महज 99 रुपये की शुरुआती राशि से पेंशन खाता खोला जा सकता है। डिलीवरी पार्टनर्स अब केवल 99 रुपये जमा करके अपने पेंशन अकाउंट की शुरुआत कर सकते हैं। इसके बाद इसमें आगे निवेश करने के लिए कोई सख्त न्यूनतम या अधिकतम सीमा तय नहीं की गई है।

चूंकि गिग वर्कर्स की आय प्रतिदिन के ऑर्डर्स पर निर्भर करती है इसलिए इस योजना को बेहद लचीला बनाया गया है। काम कम या ज्यादा होने पर वर्कर अपनी सुविधा और दैनिक या मासिक कमाई के अनुसार निवेश की राशि घटा या बढ़ा सकते हैं। इस पेंशन योजना की सबसे अनूठी बात यह है कि इसमें ई-कॉमर्स और डिलीवरी कंपनियां भी भागीदार बन सकती हैं।

स्विगी, जोमैटो या ब्लिंकिट जैसी एग्रीगेटर कंपनियां चाहें तो अपने वर्कर्स की तरफ से पूरा योगदान दे सकती हैं। कंपनी और वर्कर दोनों मिलकर भी 50-50 फीसदी का योगदान दे सकते हैं। यदि कोई कंपनी योगदान नहीं भी देती तो भी वर्कर खुद अकेले अपनी मर्जी से इस योजना में पैसे जमा कर सकता है।

यदि कोई एग्रीगेटर कंपनी अपने वर्कर्स को इस योजना से जोड़ती है तो पूरी प्रक्रिया को बहुत सरल रखा गया है। कंपनी को वर्कर की बुनियादी जानकारी दर्ज करानी होगी, जैसे नाम, पता, मोबाइल नंबर और बैंक खाता विवरण।
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वर्कर की सहमति मिलते ही उसका 'स्थायी सेवानिवृत्ति खाता संख्या' यानी PRAN (Permanent Retirement Account Number) तुरंत जनरेट हो जाएगा। इसके बाद हर महीने या प्रति ऑर्डर के हिसाब से तय की गई छोटी-छोटी रकम सीधे वर्कर के पेंशन खाते में जमा होती रहेगी।
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बता दें कि भारत में Gig Economy का दायरा लगातार बढ़ रहा है और लाखों युवा डिलीवरी और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में काम कर रहे हैं। पारंपरिक सरकारी या कॉर्पोरेट नौकरियों की तरह इन प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वालों को प्रोविडेंट फंड (PF) या ग्रेच्युटी जैसी सुविधाएं नहीं मिलती थीं। इसी सामाजिक सुरक्षा के अंतर को खत्म करने और असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए PFRDA ने यह महत्वपूर्ण पहल की है।
