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हॉकी में पितामह का दर्जा हासिल करने वाले बलबीर सिंह सीनियर के निधन पर खेल जगत का सलाम

2020-05-26T09:39:27.08

चंडीगढ़(लल्लन) : हॉकी में पितामह का दर्जा हासिल करने वाले बलबीर सिंह सीनियर के निधन से पूरा खेल जगत सदमे में है। सोमवार को उनके निधन के बाद शोक संदेश का सिलसिला शुरू हो गया। उनके चाहवानों और खेल जगत के दिग्गजों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। 

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देश के राष्ट्रपति से प्रधानमंत्री तक ट्वीट कर उनके निधन पर दुख जताया। वहीं चंडीगढ़ की सांसद किरण खेर व प्रशासक वी.पी. बदनौर ने भी कहा कि वे हॉकी ही नहीं खेल जगत में भारत के सबसे ज्यादा चमकदार सितारा थे, आपके जैसा न कोई दूसरा हुआ न होगा।

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पूर्व अंतर्राष्ट्रीय हॉकी अंपायर सतिंदर शर्मा ने बलबीर सिंह के साथ अपनी पुरानी एक फोटो फेसबुक पर शेयर की है और उन्हें श्रद्धांजलि दी है। जबकि सिटी की रोइंग एसोसिएशन ने भी शोक संदेश देकर श्रद्धाजॉलि दी। इसी तरह एशियाई हॉकी संघ ने बाकायदा शोक संदेश पर आधरित पत्र भी जारी किया।

हम तो उनकी सैंचुरी पूरी होते देखना चाहते थे :
सीनियर की कोचिंग में देश ने अंतिम व पहली बार 1975 वर्ल्ड कप जीता था। उस वर्ल्ड कप की तैयारी के गवाह रहे प्रोफैसर जितेंद्र मोहन तब पी.यू. में टीम के मनोचिकित्सक की भूमिका में थे। उन्होंने भारी दिल से कहा कि हम तो उनकी सैंचुरी देखना चाहते थे। अब वह इतिहास और यादों में रहेंगे।

गुम हो गए थे मैडल, सीनियर कहते थे यही मेरे जीवन की सबसे बड़ी पूंजी थी :
पदमश्री बलबीर सिंह सीनियर ने स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया को साल 1985 में अपने 36 मैडल, सन 1956 ओलिंपिक में गोल्ड मैडल जीतने के समय पहना हुआ लेजर और 120 के करीब अलग-अलग खेल प्रतियोगिता में ईनाम जीतने के दौरान खींची गई फोटो जमा करवाई थी, जिनके गुम होने की जानकारी उनको 2012 में उस समय मिली जब लंदन ओलिंपिक में समानित होने के लिए उनको आमंत्रित किया गया। 

लंदन ओलिंपिक में सम्मानित होने वाले खिलाड़ियों को अपना कलैक्शन डिस्प्ले करना था। जब बलबीर सीनियर ने डिस्प्ले के लिए अपने मैडल साई से मांगे तो पता चला कि वे यूजियम से गुम हैं। साई का कहना था कि उसके पास कोई रिकार्ड नहीं। बलबीर सिंह सीनियर कहते थे यही मेरे लिए जीवन की यही सबसे बड़ी पूंजी थी।

‘हवा में तिरंगा, राष्ट्रगान, जैसे कल की बात हो’ :
96 साल के हॉकी लीजैंड बलबीर सिंह सीनियर ने सोमवार सुबह अंतिम सांस ली। उन्होंने लंदन ओलंपिक में गोल्ड मैडल जीतने पर एक इंटरव्यू में 2018 में कहा था, इस घटना के आज 70 साल हो गए, लेकिन ऐसा लगता है कि जैसे यह कल की बात हो। 

उन्होंने कहा था कि तिरंगा धीरे-धीरे ऊपर जा रहा था। हमारा राष्ट्रगान बज रहा था। मेरे फ्रीडम फाइटर पिता के शब्द ‘हमारा झंडा, हमारा देश, मेरे जेहन में गूंज रहा था। तब मैं समझा था इसका क्या मतलब होता है। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं भी मैदान में तिरंगे के साथ ऊपर जा रहा हूं।’

हमेशा याद किए जाएंगे :
चंडीगढ़ के प्रशासक वी.पी.बदनौर ने कहा कि ट्रिपल गोल्ड मैडलिस्ट बलबीर सिंह सीनियर का इस दुनिया से जाना बेहद दुखद है। उनका जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है, क्योंकि उनसे मेरी पर्सनल बॉन्डिंग थी। वह अच्छे व्यक्तित्व व हॉकी लीजैंड थे। उनको हमेशा याद किया जाएगा।

आपके जैसा ना कोई दूसरा हुआ ना होगा :
चंडीगढ़ की सांसद किरण खेर ने कहा कि भारतीय हॉकी के दिग्गज पद्मश्री बलबीर सिंह जी के निधन की ख़बर बहुत दु:खद है। आप सिर्फ हॉकी ही नहीं खेल जगत में भारत के सबसे ज्यादा चमकदार सितारा थे, आपके जैसा ना कोई दूसरा हुआ ना होगा। आपकी यादें हमेशा सब हिंदुस्तानियों के दिलों में अमर रहेंगी। 
वाहेगुरु परिवार को धैर्य व शक्ति दे।

भारतीय खेल जगत को लगा गहरा आघात :
भाजपा के वरिष्ठ नेता संजय टंडन ने कहा कि गोल मशीन के नाम से मशहूर, हॉकी के महान जादूगर, तीन बार ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले पद्मश्री बलबीर सिंह सीनियर जी के देहांत से भारतीय खेल जगत को गहरा आघात लगा है। मैं ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं, ईश्वर उनके परिवार को इस दु:ख की घड़ी से लडऩे की शति दे।

बलबीर सिंह जी सीनियर के निधन की दुखद खबर से बहुत आहत हूं :
भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष अरूण सूद ने कहा कि भारत के महानतम हॉकी खिलाडिय़ों में से एक पद्म श्री सरदार बलबीर सिंह जी सीनियर के निधन की दुखद खबर से बहुत आहत हूं। महान व्यतित्व के धनी सरदार बलबीर सिंह जी की आत्मा को वाहेगुरु जी अपने चरणों में शरण दें।


Priyanka rana

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