KP Unnikrishnan: राजनीतिक जगत में शोक की लहर: लगातार 6 बार लोकसभा चुनाव जीतने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता का निधन
punjabkesari.in Tuesday, Mar 03, 2026 - 12:10 PM (IST)
senior congress leader died: केरल के वडकारा से 6 बार सांसद रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री के. पी. उन्नीकृष्णन का 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन के साथ ही तीन दशक से अधिक समय तक राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे एक महत्वपूर्ण राजनीतिक अध्याय का अंत हो गया। 20 सितंबर 1936 को मालाबार तट के एक परिवार में जन्मे उन्नीकृष्णन, ई. कुन्हिकन्नन नायर के पुत्र थे। उन्होंने चेन्नई के मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की और वहीं से कानून की डिग्री भी पूरी की।
राजनीतिक जीवन की शुरुआत उन्होंने सोशलिस्ट पार्टी और प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से की। बाद में 1960 के दशक में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए और 1962 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य बने। पूर्णकालिक राजनीति में आने से पहले वे एक पत्रकार के रूप में भी कार्यरत रहे और मातृभूमि सहित कई पत्र-पत्रिकाओं में विशेष संवाददाता के तौर पर लेखन किया।।
Kerala | Former Union Minister and senior Congress leader K.P. Unnikrishnan passed away at a private hospital in Kozhikode today
— ANI (@ANI) March 3, 2026
Kerala Chief Minister Pinarayi Vijayan has expressed deep condolences on the passing of former Union Minister KP Unnikrishnan
(file pic of KP… pic.twitter.com/SLulvJC9sI
उनकी संसदीय पारी 1971 में शुरू हुई, जब उन्हें वडकारा से कांग्रेस उम्मीदवार बनाया गया। उन्होंने 1971, 1977, 1980, 1984, 1989 और 1991 में लगातार 6 लोकसभा चुनाव जीते। 1996 में उन्हें पहली और एकमात्र चुनावी हार का सामना करना पड़ा।
राजनीतिक जीवन में उन्होंने दल बदल भी किए—1980 में कांग्रेस (यू) और 1984 में इंडियन कांग्रेस (सोशलिस्ट) से जुड़े—लेकिन वडकारा में उनका जनाधार मजबूत बना रहा। 1981 से 1984 के बीच वे कांग्रेस (सेक्युलर) के संसदीय दल के नेता रहे और 1980 से 1982 तक लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee) के सदस्य भी रहे। 1989-90 में V. P. Singh की सरकार में उन्होंने दूरसंचार, शिपिंग और सतही परिवहन मंत्री के रूप में कार्य किया। खाड़ी युद्ध संकट के दौरान भारतीयों की सुरक्षित वापसी (एवैक्यूएशन) में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
गौरतलब है कि उनका निधन ऐसे समय हुआ है जब पश्चिम एशिया एक बार फिर तनाव और संघर्ष के दौर से गुजर रहा है। 1996 के बाद सक्रिय राजनीति से दूर होकर वे नई दिल्ली और कोझिकोड जिले के पन्नियानकरा स्थित अपने पैतृक घर में समय बिताते थे और पढ़ने-लिखने में रुचि लेते थे।
