दिल्ली हिंसा मामले में 'पिंजरा तोड़' एक्टिविस्ट को जमानत,  हाईकोर्ट ने कहा-  कब तक करें इंतज़ार ?

2021-06-15T13:06:14.457

नेशनल डेस्क:  दिल्ली उच्च न्यायालय ने उत्तर-पूर्व दिल्ली दंगे के एक मामले में जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय की छात्राओं नताशा नरवाल, देवांगना कालिता और जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा को जमानत दे दी। इन लोगों को पिछले साल फरवरी में दंगों से जुड़े एक मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था।

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न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति एजे भंभानी की पीठ ने निचली अदालत के इन्हें जमानत ना देने के आदेश को खारिज करते हुए तीनों को नियमित जमानत दे दी। अदालत ने पिंजड़ा तोड़ कार्यकर्ताओं नताशा नरवाल, देवांगना कालिता और तन्हा को अपने-अपने पासपोर्ट जमा करने, गवाहों को प्रभावित न करने और सबूतों के साथ छेड़खानी न करने का निर्देश भी दिया।

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मामले में सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कहा था कि इस मामले में कुल 740 अभियोजन पक्ष के गवाह हैं जिनकी अभी जांच होनी है। इस आधार पर दिल्ली पुलिस ने इनकी बेल का विरोध किया था। कोर्ट ने इस पर पुलिस को फटकार लगते हुए कहा कि“कोर्ट कब तक इंतज़ार करे? आरोपी को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत त्वरित ट्रायल का अधिकार है.”

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गौरतलब है कि 24 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्व दिल्ली में संशोधित नागरिकता कानून के समर्थकों और विरोधियों के बीच हिंसा भड़क गई थी, जिसने सांप्रदायिक टकराव का रूप ले लिया था। हिंसा में कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी तथा करीब 200 लोग घायल हो गए थे।
 


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Content Writer

vasudha

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