बंगाल में 252 मदरसों पर ताला लगाने की तैयारी? सरकार के फैसले पर ताहा सिद्दीकी की दो टूक...
punjabkesari.in Monday, Sep 14, 2026 - 01:06 PM (IST)
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सरकार ने राज्यभर में अनधिकृत और बुनियादी ढांचे की कमी वाले मदरसों के खिलाफ बड़ी कारर्वाई शुरू की है। इसके तहत 252 संस्थानों को बंद करने के नोटिस जारी किए गये हैं, जबकि करीब 100 अन्य मदरसों को निर्धारित नियमों का कथित रूप से उल्लंघन कर संचालन करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किए गये हैं। इसे लेकर अब सियासत तेज हो गई है। फुरफुरा शरीफ के पीरजादा ताहा सिद्दीकी ने मदरसों को बंद करने के राज्य सरकार पर अपनी बात रखी। ताहा सिद्दीकी का कहना है कि धार्मिक शिक्षा दूसरे धर्मों से प्यार और सम्मान करना सिखाती है। उनका कहना है कि धार्मिक शिक्षा हर धर्म के बच्चों को दी जानी चाहिए।
छात्र-छात्राओं के भविष्य का क्या होगा?
ताहा सिद्दीकी ने सवाल किया कि अगर 252 मदरसे बंद कर दिए जाते हैं तो वहां पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के भविष्य का क्या होगा? उन्होंने कहा कि मदरसों में सिर्फ धार्मिक शिक्षा नहीं दी जाती। ज्यादातर मदरसों में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ सामान्य शिक्षा भी दी जाती है। स्कूलों की तरह यहां भी सामान्य विषयों के पाठ्यक्रम की पढ़ाई होती है।
एक धर्म का इंसान दूसरे धर्म के लोगों से प्यार करना सीखता है
उन्होंने कहा कि धार्मिक शिक्षा के जरिए एक धर्म का इंसान दूसरे धर्म के लोगों से प्यार और सम्मान करना सीखता है। देश से प्रेम करने की भावना भी इसी शिक्षा के जरिए विकसित होती है। धार्मिक शिक्षा हमें यह समझने का अवसर देती है कि हम हिंदू, मुस्लिम, जैन या ईसाई होने से पहले इंसान हैं। उन्होंने कहा कि जिन मदरसों के पास सरकारी मान्यता नहीं है, उन्हें बंद करना समाधान नहीं है।
252 मदरसों को बंद करने के नोटिस
आप को बता दें कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निर्देश के बाद प्रदेश के प्रत्येक जिले में सर्वेक्षण के जरिए यह पता लगाने का निर्देश दिया था कि प्रत्येक जिले में कितने मदरसे अधिकृत हैं और कितने बिना मंजूरी के संचालित हो रहे हैं। अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग ने राज्यभर में सर्वेक्षण कर मदरसों के रिकॉडर् और उनके कामकाज की जांच की। अधिकारियों ने कोलकाता सहित सभी 23 जिलों में स्थित मदरसों से दस्तावेज एकत्र किए और उनकी स्थिति का भौतिक सत्यापन किया। इस प्रक्रिया में पाया गया कि कई संस्थान आवश्यक सरकारी मंजूरी के बिना या पर्याप्त बुनियादी सुविधाओं के अभाव में संचालित हो रहे हैं। वहीं, 252 मदरसों को बंद करने के नोटिस जारी किए गये हैं, जबकि करीब 100 अन्य से यह बताने को कहा गया है कि उनके खिलाफ कारर्वाई क्यों नहीं की जानी चाहिए। कारण बताओ नोटिस प्राप्त करने वाले संस्थानों को जवाब देने के लिए निर्धारित समय दिया गया है। इसके बाद विभाग आगे की कारर्वाई पर निर्णय करेगा।
राज्य में 2,396 मदरसों के पास आवश्यक सरकारी मंजूरी नहीं
विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 2,396 मदरसों के पास आवश्यक सरकारी मंजूरी नहीं है, जबकि 2,132 मदरसे वैध मंजूरी के साथ संचालित हो रहे हैं। अल्पसंख्यक विकास मंत्री खुदीराम टुडू ने कहा, 'जमीनी स्तर पर सत्यापन किया गया है। सभी मदरसों के दस्तावेज एकत्र कर लिए गए हैं। जिन मदरसों के पास मंजूरी है, वे अपना कामकाज जारी रखेंगे।' सरकार का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य मान्यता प्राप्त संस्थानों और निर्धारित नियामक ढांचे से बाहर संचालित हो रहे संस्थानों के बीच अंतर करना है। जून की शुरुआत में राज्य सरकार ने सरकारी और निजी मदरसों का जिला स्तर पर विशेष निरीक्षण कराया था। इसका उद्देश्य इन संस्थानों की मौजूदा स्थिति, बुनियादी ढांचे, छात्रों की संख्या, शैक्षणिक माहौल और प्रशासनिक कामकाज का जमीनी स्तर पर आकलन करना था।
