1948 की अधूरी लड़ाई का 2026 में अंत: अमित शाह ने पूरा किया सरदार पटेल का 'अखंड भारत' मिशन
punjabkesari.in Wednesday, Apr 01, 2026 - 03:41 PM (IST)
नेशनल डेस्क: RP Singh बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और एक प्रमुख नेता हैं। उनके राजनीतिक बैकग्राउंड को देखें तो सिंह राजधानी दिल्ली विधानसभा में राजिंदर नगर निर्वाचन क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं। इसके अलावा वे दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति यानि की DSGMC से भी जुड़े रहे हैं। सिंह एक प्रवक्ता होने के नाते अक्सर मीडिया के सामने दिल्ली, पंजाब को लेकर पार्टी का पक्ष रखते हैं। इसके अलावा वे ट्वीट के जरिए भी लोगों के सामने बातें रखते हैं। हाल ही में आरपी सिंह ने नक्सलवाद के मुद्दे पर एक पोस्ट शेयर किया है। इसमें उन्होंने कहा बताया है कि कैसे ‘लौह पुरुष सरदार पटेल’ ने 1948 में देश को नक्सलवाद से मुक्त करवाने का मिशन शुरु किया था, जिसे अमित शाह ने 2026 में पूरा किया है।

आरपी सिंह ने लिखा ये पोस्ट
सरदार वल्लभभाई पटेल ने एक एकीकृत और सुरक्षित भारत का जो सपना देखा था, वह आज अपने आधुनिक पूर्णता तक पहुँच गया है। वर्ष 2026 तक, नक्सलवाद के कलंक को पूरी तरह मिटा दिया गया है एक ऐसी उपलब्धि जो स्वयं 'लौह पुरुष' द्वारा संचालित ऐतिहासिक पुलिस एक्शन की याद दिलाती है।
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From 1948 to 2026: The Legacy of Iron Will
— RP Singh National Spokesperson BJP (@rpsinghkhalsa) March 31, 2026
The dream of a unified, secure India envisioned by Sardar Vallabhbhai Patel has found its modern completion. As of 2026, the scourge of Naxalism has been dismantled a feat that mirrors the legendary "Police Action" led by the Iron Man… pic.twitter.com/xBj58ydTuq
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ऐतिहासिक विश्वासघात (1948-1951)
जब भारत अपनी कठिन आजादी का जश्न मना रहा था, तब आंतरिक खतरे पहले से ही सिर उठा रहे थे। मार्च 1948 में, 'कलकत्ता थीसिस' के दौरान, कम्युनिस्ट नेताओं ने भारत की स्वतंत्रता को "झूठा" (ये आज़ादी झूठी है) घोषित कर दिया और इस युवा लोकतंत्र के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह छेड़ दिया। वामपंथी चरमपंथियों ने तेलंगाना को युद्ध के मैदान में बदल दिया था।अवसरवाद का चौंकाने वाला प्रदर्शन करते हुए, इन समूहों ने हैदराबाद के निजाम और उनकी क्रूर 'रजाकार' मिलिशिया के साथ हाथ मिला लिया ताकि भारतीय सेना के खिलाफ लड़ा जा सके। सरदार पटेल ने कड़ा प्रहार करते हुए हैदराबाद और कई अन्य राज्यों में कम्युनिस्ट पार्टी पर प्रतिबंध लगा दिया। उनके सीधे आदेशों के तहत, इस उग्रवाद का जवाब पूरी ताकत के साथ दिया गया। इसका परिणाम यह निकला कि 1951 तक विद्रोह को कुचल दिया गया, और चरमपंथियों को अपने हथियार डालने और उस लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होने के लिए मजबूर होना पड़ा जिसका उन्होंने कभी मजाक उड़ाया था।

2026 में अमित शाह के नेतृत्व में लिखा गया अंतिम अध्याय
इतिहास खुद को दोहराता है। सरदार पटेल ने 1940 के दशक में जो शुरुआत की थी, गृह मंत्री अमित शाह ने 2026 में उसे एक निर्णायक अंत तक पहुँचाया है।
- शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance): "विकास + सुरक्षा" के ब्लूप्रिंट का पालन करते हुए, सरकार ने नक्सल गलियारों की फंडिंग और रसद (Logistics) की कमर तोड़ दी।
- रणनीतिक सटीकता: पटेल ने दक्कन के जंगलों में विद्रोहियों को बेअसर किया था, उसी तरह आधुनिक ऑपरेशनों ने 'रेड कॉरिडोर' के सबसे दुर्गम इलाकों को साफ कर दिया है।
- नक्सल-मुक्त भारत: आज, भारत के नक्शे से वह "लाल रंग" इतिहास बन चुका है, जिसकी जगह अब स्कूलों, सड़कों और अस्पतालों के रोडमैप ने ले ली है।
नैरेटिव का विरोधाभास
आज संविधान की आड़ में छिपने वाले लोग अक्सर यह भूल जाते हैं कि उनके पूर्वज वही थे जिन्होंने सबसे पहले संविधान के खिलाफ हथियार उठाए थे। जब RSS जैसे संगठन राष्ट्र के सामाजिक ताने-बाने का निर्माण कर रहे थे, तब ये अराजक तत्व देश के विभाजन की साजिश रच रहे थे।
