कावेरी जल विवाद पर सर्वदलीय बैठक, सीएम डीके शिवकुमार ने मीटिंग को बताया ऐतिहासिक
punjabkesari.in Sunday, Aug 02, 2026 - 05:23 PM (IST)
कावेरी नदी के पानी को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद एक बार फिर गर्मा गया है। कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) के आदेश का पालन कराने की मांग को लेकर DMK सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। वहीं कर्नाटक सरकार ने इस मुद्दे पर रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई।
बैठक को बताया ऐतिहासिक
कावेरी जल विवाद पर आयोजित सर्वदलीय बैठक के बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बैठक को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि सभी दलों ने राज्य के हित में सरकार के साथ मिलकर काम करने और मार्गदर्शन देने का भरोसा दिलाया है। सीएम ने कहा, “राज्य के हित में बहुत ही मूल्यवान सुझाव आए हैं। हमने उन्हें नोट कर लिया है और मैं निश्चित रूप से उन पर अमल करूंगा।
#WATCH | Bengaluru: After an all-party meeting over the Cauvery water issue, Karnataka CM DK Shivakumar says, "It was a historic meeting of all the party leaders today. They assured that they would work with the government in the interest of Karnataka and are ready to guide us in… pic.twitter.com/JZVf1nuOgx
— ANI (@ANI) August 2, 2026
कितना पानी छोड़ने का आदेश?
कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) से कर्नाटक सरकार को आदेश मिला है। तमिलनाडु ने लगभग 9 हजार मिलियन क्यूबिक फीट पानी की मांग की थी। आखिरकार 15 दिनों के लिए 4 हजार मिलियन क्यूबिक फीट पानी छोड़ने का आदेश दिया गया। सीएम डीके शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक को लगभग 36 हजार मिलियन क्यूबिक फीट पानी की जरूरत है। वाष्पीकरण और छोटी-मोटी आंतरिक जरूरतों के लिए भी 4 हजार मिलियन क्यूबिक फीट पानी अलग रखने की बात कही गई। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु को 177 हजार मिलियन क्यूबिक फीट पानी देना कर्नाटक की जिम्मेदारी है, लेकिन इस साल अल नीनो के कारण सामान्य से कम बारिश हुई है। जलाशयों में पानी की कमी है और राज्य में पेयजल संकट पैदा हो सकता है। इसलिए फिलहाल तय मात्रा में पानी नहीं छोड़ा जा सकता।
विवाद की ताजा वजह
28 जुलाई को CWRC ने कर्नाटक सरकार को निर्देश दिया था कि वह अगले 15 दिनों तक हर दिन 3,500 क्यूसेक पानी तमिलनाडु के लिए छोड़े। कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) ने भी इस आदेश को बरकरार रखा। कर्नाटक सरकार ने इस आदेश को मानने से इनकार कर दिया है। राज्य सरकार का तर्क है कि पानी की कमी के कारण अभी तमिलनाडु के लिए निर्धारित मात्रा में पानी छोड़ना संभव नहीं है।
