शहीद अग्निवीरों को नहीं मिलेगी नियमित सैनिकों जैसी पेंशन... केंद्र सरकार ने कोर्ट में रखी दलील

punjabkesari.in Tuesday, May 12, 2026 - 01:22 PM (IST)

Agniveer Pension Scheme: अग्निवीर शहादत पर पेंशन को लेकर केंद्र ने कोर्ट से कहा  नियमित सैनिकों जैसे लाभ नहीं मिल सकते। बता दें कि मुंबई में चल रहे एक अहम मामले में केंद्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया है कि ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले अग्निवीरों के परिवारों को नियमित सैनिकों जैसी मरणोपरांत पेंशन सुविधाएं नहीं दी जा सकतीं। सरकार का कहना है कि अग्निवीर और स्थायी सैनिकों की सेवा शर्तें अलग-अलग हैं, इसलिए दोनों को समान कैटेगरी में नहीं रखा जा सकता।

 दरअसल, शहीद अग्निवीर मुरली नायक की मां ज्योतिबाई नायक की ओर से दायर याचिका के दौरान यह मामला सामने आया। मुरली नायक पिछले साल 9 मई 2025 को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान शहीद हुए थे। याचिका में मांग की गई थी कि अग्निवीरों के परिवारों को भी वही पेंशन और कल्याणकारी लाभ दिए जाएं, जो सेना के नियमित जवानों के परिवारों को मिलते हैं।

केंद्र सरकार ने क्या कहा?
केंद्र ने अदालत में दाखिल अपने जवाब में कहा कि ‘अग्निपथ योजना’ एक special और limited period की भर्ती व्यवस्था है। इस योजना के तहत युवाओं को केवल 4 साल के लिए सेना में नियुक्त किया जाता है। वहीं, नियमित सैनिक लंबे समय तक सेवा करते हैं और पेंशन जैसी सुविधाएं उसी लंबी सेवा अवधि के आधार पर तय होती हैं।

सरकार ने कहा कि अग्निवीरों की नियुक्ति, सेवा अवधि और भर्ती नियम नियमित सैनिकों से अलग हैं। इसलिए दोनों वर्गों के बीच अंतर करना संविधान के खिलाफ नहीं माना जा सकता। केंद्र के अनुसार, यह नीति राष्ट्रीय सुरक्षा और सेना के ढांचे में बदलाव को ध्यान में रखकर बनाई गई है। ऐसे नीतिगत फैसलों में अदालत का दखल सीमित होना चाहिए।

याचिका में क्या कहा गया था?
याचिकाकर्ता ज्योतिबाई नायक ने अपनी याचिका में कहा कि अग्निवीरों को भी सीमावर्ती और जोखिम वाले इलाकों में वही खतरे उठाने पड़ते हैं, जिनका सामना नियमित सैनिक करते हैं। ऐसे में शहादत के बाद उनके परिवारों के साथ अलग व्यवहार करना उचित नहीं है। याचिका में यह भी कहा गया कि अग्निपथ योजना सैनिकों के बीच असमानता पैदा करती है और शहीद अग्निवीरों के परिवारों को सामाजिक सुरक्षा से वंचित करती है।

परिवार पेंशन पर केंद्र सरकार ने क्या कहा?
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि मौजूदा नियमों में अग्निवीरों के परिजनों को फैमिली पेंशन देने का कोई प्रावधान नहीं है। हालांकि, सरकार ने यह भी बताया कि मुरली नायक का अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया था। इसके अलावा उनके परिवार को लगभग 2.3 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और मुआवजा दिया गया। सेना की ओर से संवेदना पत्र भी सौंपा गया, जैसा कि अन्य शहीद सैनिकों के मामलों में किया जाता है।


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Content Editor

Anu Malhotra

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