अनर्ब के बाद अब एक और शक्तिशाली तूफान की आहट, बंगाल की खाड़ी से इन राज्यों पर मंडराया खतरा
punjabkesari.in Sunday, Nov 01, 2026 - 09:20 PM (IST)
भुवनेश्वरः बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना गहन दबाव रविवार को चक्रवाती तूफान में बदल गया, जिसके बाद ओडिशा सरकार ने राज्य के दक्षिणी हिस्से में किसी भी आपात स्थिति से निपटने की तैयारियां तेज कर दी हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। मौसम विभाग के अनुसार, यह तीन नवंबर की सुबह नेल्लोर और नरसापुर के बीच आंध्र प्रदेश के तट को पार कर सकता है।
विभाग के अनुसार, इस दौरान हवा की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा रह सकती है, जो बढ़कर 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। भारत ने इस तूफान को 'मुरासु' नाम दिया है, जिसका अर्थ युद्ध का नगाड़ा होता है। इससे कुछ दिन पहले चक्रवात 'अर्नब' आंध्र प्रदेश के तट से टकराया था, जिसने पड़ोसी राज्य ओडिशा को भी प्रभावित किया था। अठाईस अक्टूबर को तट से टकराते समय हवा की रफ्तार 150 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई थी।
भुवनेश्वर मौसम विज्ञान केंद्र की निदेशक मनोरमा मोहंती ने बताया कि चक्रवात के प्रभाव से ओडिशा में दो नवंबर से बारिश शुरू होगी। तीन नवंबर को बारिश की तीव्रता बढ़ेगी और चार नवंबर तक जारी रहेगी। राज्य के आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि आने वाले चक्रवात से निपटने के लिए सरकार पूरी तरह तैयार है। उन्होंने लोगों से न घबराने की अपील की।
पुजारी ने बताया कि चक्रवात अर्नब से बुरी तरह प्रभावित हुए गंजाम जिले समेत राज्य के दक्षिणी हिस्से में पहले ही हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने चक्रवात मुरासु के तट से टकराने से पहले निचले इलाकों और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का आदेश दिया है।
ओडिशा के विशेष राहत आयुक्त (एसआरसी) राजेश पी. पाटिल ने बताया कि सरकार दो मोर्चों पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पहला मोर्चा चक्रवात अर्नब के बाद आई बाढ़ से प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाना और नुकसान की भरपाई करना है। उन्होंने कहा कि दूसरा मोर्चा आने वाली आपदा 'मुरासु' से निपटने की तैयारी करना है। पाटिल ने कहा, "राहत और पुनर्वास का काम युद्धस्तर पर जारी है। चक्रवात अर्नब और उसके बाद आई बाढ़ से गंजाम एवं कंधमाल जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। इस आपदा से करीब 1.18 लाख लोग प्रभावित हुए हैं।"
पाटिल ने बताया कि इस बार पहाड़ी इलाकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, क्योंकि भूस्खलन आपदा प्रबंधन के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। चक्रवात अर्नब के कारण लगातार हुई बारिश से ओडिशा में अब तक 10 जगह भूस्खलन हुए हैं और इस आपदा में पांच लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि पिछली आपदा से सबक लेते हुए राज्य सरकार ने गजपति जिले में भूस्खलन की आशंका वाले करीब 150 स्थानों की पहचान की है। वहां से सोमवार दोपहर तक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि चक्रवात अर्नब और उसके बाद आई बाढ़ से 75,388 हेक्टेयर फसल क्षेत्र प्रभावित हुआ है और 1,672 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। पाटिल ने कहा कि दक्षिणी ओडिशा के चक्रवात प्रभावित इलाकों में बिजली आपूर्ति बहाल करने का काम तेज कर दिया गया है और इसके लिए 6,400 से अधिक कर्मचारी तैनात किए गए हैं।
