7 घंटे के लिए मरी...फिर लौट आई जान, महिला ने सुनाया रोंगटे खड़े करने वाला परलोक का अनुभव
punjabkesari.in Monday, Jan 05, 2026 - 04:26 PM (IST)
नेशनल डेस्क: अमेरिका के न्यू जर्सी की रहने वाली एरिका टेट की कहानी इन दिनों दुनियाभर में चर्चा का विषय बनी हुई है। एरिका का दावा है कि वह करीब 7 घंटे तक क्लिनिकली डेड रहीं और इस दौरान उन्होंने उस दुनिया का अनुभव किया, जिसे आमतौर पर लोग परलोक या स्वर्ग कहते हैं। उनका कहना है कि मौत के करीब पहुंचकर उन्होंने जो देखा और महसूस किया, उसने उनकी पूरी सोच और जीवन का नजरिया बदल दिया।
2015 में हुआ था दर्दनाक हादसा
यह घटना साल 2015 की है, जब 32 वर्षीय एरिका न्यू जर्सी के पैलिसेड्स क्लिफ्स इलाके में हाइकिंग कर रही थीं। इसी दौरान उनका पैर फिसल गया और वह करीब 60 फीट गहरी खाई में गिर गईं। हादसा इतना गंभीर था कि उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गई, पसलियां और हाथ फ्रैक्चर हो गए और दोनों फेफड़े भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। दर्द से जूझते हुए एरिका ने फोन से मदद मांगी, लेकिन सही लोकेशन न मिलने के कारण रेस्क्यू टीम को पहुंचने में करीब 7 घंटे लग गए। जब उन्हें अस्पताल लाया गया, तब डॉक्टरों के मुताबिक उनकी हालत बेहद नाजुक थी और वह क्लिनिकली मौत की स्थिति में पहुंच चुकी थीं।
मौत के करीब पहुंचकर क्या महसूस किया?
एरिका का कहना है कि हादसे के बाद उन्होंने खुद को अपने शरीर से अलग महसूस किया। उनके अनुसार, वह ऊपर से अपने घायल शरीर को देख पा रही थीं। उन्होंने बताया कि उस समय उन्हें किसी तरह का दर्द नहीं था, बल्कि एक अजीब सी शांति और सुकून महसूस हो रहा था। उनका दावा है कि उनकी पूरी जिंदगी एक फिल्म की तरह आंखों के सामने चलने लगी। उन्होंने अपने पुराने फैसलों, रिश्तों और दूसरों को दिए गए दुख को गहराई से महसूस किया। एरिका के मुताबिक, वहां हर काम का असर साफ तौर पर नजर आ रहा था।
न स्वर्ग-नरक, न फरिश्ते, सिर्फ रोशनी
एरिका ने बताया कि उनके अनुभव में न तो कोई स्वर्ग-नरक था और न ही कोई फरिश्ता या न्याय करने वाली शक्ति। उनके अनुसार, वहां एक बेहद तेज और चमकदार रोशनी थी, जो उन्हें अपनी ओर खींच रही थी। वह इस रोशनी को ‘यूनिवर्सल कॉन्शसनेस’ या ईश्वर का रूप मानती हैं। उनका कहना है कि यह रोशनी प्यार, शांति और अपनापन से भरी हुई थी।
आध्यात्मिक सोच की ओर बढ़ीं एरिका
एरिका का कहना है कि इस हादसे से पहले वह ईश्वर या आध्यात्मिकता में विश्वास नहीं करती थीं, लेकिन इस अनुभव के बाद उनकी सोच पूरी तरह बदल गई। अब उनका मानना है कि मौत अंत नहीं है, बल्कि एक भ्रम है। उनके अनुसार, सभी इंसान एक ही ऊर्जा से जुड़े हुए हैं और किसी को दुख देना दरअसल खुद को नुकसान पहुंचाने जैसा है। एरिका लोगों से यही संदेश देती हैं कि स्वर्ग और नर्क की चिंता करने के बजाय करुणा, प्रेम और एकता के साथ जीवन जीना ज्यादा जरूरी है। उनकी यह कहानी सोशल मीडिया पर बहस और जिज्ञासा का विषय बनी हुई है।
