दिल्ली के विकास का नया रोडमैप तैयार, LG संधू ने ‘दिल्ली मास्टर प्लान 2047’ को दी मंजूरी
punjabkesari.in Thursday, Aug 13, 2026 - 04:10 PM (IST)
नयी दिल्ली: दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने बुधवार को शहर के सुनियोजित विकास के उद्देश्य से निर्मित 'दिल्ली मास्टर प्लान 2047' को मंजूरी दी। यह जानकारी अधिकारियों ने दी। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की बैठक की अध्यक्षता करते हुए संधू ने प्राधिकरण द्वारा बनाई गई पुरानी दो-मंजिला रिहायशी इकाइयों के पुनर्विकास के लिए एक समान नीति लाने का भी फैसला किया।
'विकसित भारत 2047' की दृष्टि के अनुरूप बनाया प्लान
डीडीए ने कहा, '' 2047 तक दिल्ली की जनसंख्या में काफी बढ़ोतरी होने के अनुमान को देखते हुए, मास्टर प्लान में आवास, आर्थिक विकास, आवागमन, पर्यावरण की स्थिरता, बुनियादी ढांचे, विरासत के संरक्षण, शहरी पुनर्विकास और नागरिकों पर केंद्रित शासन-व्यवस्था के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया गया है।'' डीडीए ने बताया कि एमपीडी (दिल्ली मास्टर प्लान) 2021 के खत्म होने के बाद पहले वह एमपीडी 2041 पर काम कर रहा था, लेकिन अब इसे बदलकर 'एमपीडी 2047' कर दिया गया है ताकि यह केंद्र सरकार के 'विकसित भारत 2047' की दृष्टि के अनुरूप हो सके।
योजनाएं 20 साल की भावी अवधि के लिए तैयार
प्राधिकरण ने एक बयान में कहा, '' अब यह योजना अंतिम मंजूरी एवं फिर अधिसूचना के लिए भारत सरकार के आवास एवं शहरी मामले मंत्रालय के पास भेजी जायेगी ।'' दिल्ली के लिए पहले मास्टर प्लान की 1957 के दिल्ली विकास अधिनियम के तहत 1962 में उद्घोषणा की गयी थी। उसके बाद 2001 और 2021 के मास्टर प्लान आए। ये योजनाएं 20 साल की भावी अवधि के लिए तैयार की गईं और इन्होंने राष्ट्रीय राजधानी के नियोजित विकास के लिए एक रूपरेखा प्रदान की। नये मास्टर प्लान में मंजूर किए गए अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों में पुरानी आवासीय इमारतों का एकसमान पुनर्विकास शामिल है।
पुरानी इमारते पुनर्विकास के निर्देश
प्राधिकरण ने कहा, ''एमपीडी-1962 के तहत बनी डीडीए की कई पुरानी आवास योजनाओं में अलग-अलग भूखंडों पर बनी दो मंज़िला इमारतें शामिल हैं, जो 50 साल से ज़्यादा पुरानी हैं और बनावट के लिहाज से कमजोर हैं। जहां खाली रिहायशी भूखंड के लिए मौजूदा एमपीडी नियमों के तहत पुनर्विकास के स्पष्ट दिशानिर्देश हैं, वहीं बनी-बनाई दो मंज़िला इमारतों के लिए कोई एक जैसा नियम नहीं था।'' डीडीए ने कहा कि इस मंज़ूरी के साथ, अब बनी-बनाई दो मंज़िला इमारतों को भी खाली रिहायशी भूखंड की तरह ही पुनर्विकास के अधिकार मिल गए हैं।
औद्योगिक इलाकों से जुड़े भी फैसले
डीडीए ने मंगोलपुरी इंडस्ट्रियल एरिया फेज 1 और केशोपुर इंडस्ट्रियल एरिया को बेहतर रखरखाव और नगर निगम से जुड़े कामों के लिए डिनोटिफाई करने को भी मंजूरी दी है. इसके अलावा रोशनपुरा में वेटरनरी काउंसिल ऑफ इंडिया के मुख्यालय के निर्माण के लिए 7,978 वर्गमीटर जमीन का भू उपयोग आवासीय से सार्वजनिक एवं अर्ध सार्वजनिक करने का फैसला हुआ है।
सरोजिनी नगर की जमीन का लैंड यूज बदलेगा
सरोजिनी नगर के पास 24,400 वर्गमीटर जमीन का लैंड यूज ट्रांसपोर्ट से रेजिडेंशियल करने को भी मंजूरी दी गई है। हालांकि, इन दोनों मामलों में आगे पब्लिक ऑब्जेकशन और सुझाव मांगे जाएंगे। डीडीए के फैसलों को देखें तो दिल्ली मास्टर प्लान 2047 सिर्फ भविष्य के शहर की योजना तक सीमित नहीं है। इसमें पुराने मकानों के रीडेवलपमेंट, मेट्रो नेटवर्क के विस्तार, भवन निर्माण की मंजूरी आसान करने और कचरे से बिजली बनाने जैसी योजनाओं को भी जगह दी गई है. अगर इन फैसलों को जमीन पर तेजी से लागू किया जाता है तो आने वाले वर्षों में दिल्ली के आवास, परिवहन, इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण से जुड़े कई क्षेत्रों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
