UPI Rules : 10 हजार से ज्यादा भेजने पर लग जाएगी 1 घंटे की ब्रेक, जानें RBI का नया प्लान
punjabkesari.in Thursday, Apr 09, 2026 - 10:01 PM (IST)
नेशनल डेस्क : डिजिटल पेमेंट के बढ़ते चलन के बीच अब UPI और IMPS ट्रांजेक्शन को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक ऐसा प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत 10,000 रुपये से अधिक की राशि भेजने पर रकम तुरंत नहीं पहुंचेगी, बल्कि उस पर 1 घंटे तक का ‘कूलिंग पीरियड’ लागू किया जा सकता है। इस प्रस्ताव पर RBI ने 8 मई 2026 तक सुझाव मांगे हैं।
डिजिटल फ्रॉड रोकने के लिए उठाया कदम
देश में बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड को देखते हुए RBI यह सख्त कदम उठाने पर विचार कर रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में डिजिटल फ्रॉड से होने वाला नुकसान 22,000 करोड़ रुपये से ज्यादा रहा।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 10,000 रुपये से ऊपर के ट्रांजेक्शन को 1 घंटे तक होल्ड पर रखा जाएगा। इस दौरान पैसा भेजने वाला व्यक्ति जरूरत पड़ने पर ट्रांजेक्शन कैंसिल भी कर सकेगा।
फ्रॉड में बड़ी रकम का ज्यादा योगदान
RBI के अनुसार, 10,000 रुपये से अधिक के ट्रांजेक्शन कुल फ्रॉड मामलों का लगभग 45% हैं, लेकिन इनकी वैल्यू कुल नुकसान का 98.5% हिस्सा बनाती है। यही वजह है कि बड़े ट्रांजेक्शन पर विशेष नियंत्रण की तैयारी की जा रही है।
प्रस्ताव की प्रमुख बातें
- 10,000 रुपये से ऊपर के UPI/IMPS ट्रांजेक्शन पर 1 घंटे का कूलिंग पीरियड
- इस दौरान ग्राहक ट्रांजेक्शन रद्द कर सकेगा
- 70 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए 50,000 रुपये से ऊपर के ट्रांसफर पर ‘ट्रस्टेड पर्सन’ की अनुमति जरूरी
- 25 लाख रुपये से ज्यादा की जमा राशि बैंक सत्यापन के बाद ही क्रेडिट होगी
- ‘किल स्विच’ की सुविधा, जिससे ग्राहक एक साथ सभी डिजिटल पेमेंट चैनल बंद कर सकेगा
क्यों जरूरी है 1 घंटे की देरी?
RBI का मानना है कि आजकल अधिकतर फ्रॉड तकनीकी खामी से नहीं, बल्कि ‘सोशल इंजीनियरिंग’ के जरिए होते हैं। ठग लोगों को डराकर या लालच देकर तुरंत पैसा ट्रांसफर करवाते हैं। ऐसे में 1 घंटे का समय पीड़ित को सोचने और गलती सुधारने का मौका देगा।
कुछ ट्रांजेक्शन को मिलेगी छूट
इस प्रस्ताव में कुछ लेन-देन को कूलिंग पीरियड से बाहर रखने की बात भी कही गई है:
- व्हाइटलिस्ट किए गए भरोसेमंद संपर्कों को भेजे गए पैसे
- मर्चेंट पेमेंट (दुकानों पर भुगतान)
- ई-मेंडेट, चेक और NACH ट्रांजेक्शन
चुनौतियां भी कम नहीं
हालांकि यह प्रस्ताव सुरक्षा के लिहाज से अहम है, लेकिन इससे UPI के ‘इंस्टेंट पेमेंट’ मॉडल पर असर पड़ सकता है। व्यापारिक लेन-देन में देरी और यूजर्स के लिए असमंजस जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।
साथ ही, यह आशंका भी जताई जा रही है कि ठग व्हाइटलिस्ट का दुरुपयोग कर सिस्टम को चकमा दे सकते हैं।
