भारत में हर घंटे एक किसान कर रहा आत्महत्या, कर्नाटक में तेजी से बढ़े मामले, NCRB रिपोर्ट में खुलासा

punjabkesari.in Saturday, May 09, 2026 - 02:12 PM (IST)

NCRB Report 2024: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा जारी वर्ष 2024 के आंकड़ों ने ग्रामीण भारत की एक विचलित करने वाली तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में किसानों और खेतिहर मजदूरों द्वारा आत्महत्या के मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे। आज भी हर घंटे एक किसान या खेतिहर मजदूर आत्महत्या कर रहा है। 

आंकड़ों की जुबानी: संकट का पैमाना 

वर्ष 2024 में कृषि क्षेत्र से जुड़े कुल 10,546 लोगों ने आत्महत्या की। हालांकि, यह संख्या 2023 के 10,786 मामलों की तुलना में मामूली रूप से कम है, लेकिन प्रतिदिन का औसत 28 आत्महत्याओं पर बना हुआ है। देश में होने वाली कुल आत्महत्याओं (1,70,746) में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी 6.2 प्रतिशत दर्ज की गई है। 

खेतिहर मजदूरों की बढ़ती असुरक्षा 

रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अब किसानों से ज्यादा खेतिहर मजदूर अपनी जान गंवा रहे हैं। कुल 10,546 मामलों में से 5,913 (56%) खेतिहर मजदूर थे। साल 2020 में यह हिस्सेदारी 47.75% थी, जो अब बढ़कर 56% हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण आय में खेती से मिलने वाली कमाई कम होने और मजदूरी पर बढ़ती निर्भरता ने आर्थिक असुरक्षा को और गहरा कर दिया है। 

महाराष्ट्र और कर्नाटक सबसे अधिक प्रभावित 

कृषि क्षेत्र में आत्महत्या के मामलों में राज्यों के बीच भारी असमानता देखी गई है। महाराष्ट्र 3,824 मामलों (36.26%) के साथ देश में शीर्ष पर बना हुआ है। वहीं कर्नाटक 2,971 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर है, यहां आत्महत्या की दर में 22.61% की तीव्र वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा मध्य प्रदेश में आत्महत्या के 835 मामले और आंध्र प्रदेश में 780 मामले (यहां 15.67% की कमी आई है) दर्ज किए गए हैं। 

हैरानी की बात यह है कि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे बड़े कृषि प्रधान राज्यों में आत्महत्या के आंकड़े महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों की तुलना में काफी कम दर्ज किए गए हैं। वहीं, पुदुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेश में भी आत्महत्या की संख्या 10 से बढ़कर 33 हो गई है।


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Ramanjot

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