पिछले 5 सालों में IITs में 53 मौतें, 62 प्रतिशत SC, ST, OBC छात्र थे : कांग्रेस

punjabkesari.in Wednesday, Sep 23, 2026 - 03:11 PM (IST)

चेन्नई : तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (TNCC) के अध्यक्ष और लोकसभा सांसद बी. मणिकम टैगोर ने बुधवार को कहा कि पिछले पांच वर्षों में देश भर के IITs में कुल 53 मौतें हुईं। उन्होंने कहा कि सबसे चिंताजनक बात यह है कि इनमें से 62 प्रतिशत छात्र SC, ST और OBC समुदायों से थे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार से मांग की कि वह बिना किसी तथ्य को छिपाए इस मुद्दे पर खुलकर बात करे। 

यहां जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में हुई 53 मौतों में से 48 मामले आत्महत्या के थे। जब संसद में यह सवाल उठाया गया, तो उच्च शिक्षा विभाग को 1 दिसंबर, 2025 को देश भर के IITs से ये विवरण प्राप्त हुए थे। लेकिन यह डेटा 8 दिसंबर, 2025 को सदन में पेश नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि यह केवल आंकड़ों का मामला नहीं है। यह एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि क्या समाज के वंचित वर्गों के छात्रों के लिए, जो IIT जैसे उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षा प्राप्त करते हैं, वहां समान, सुरक्षित और निष्पक्ष शैक्षिक माहौल मौजूद है। 

सामाजिक न्याय केवल आरक्षण देने तक सीमित नहीं है, मणिकम टैगोर ने कहा कि सरकार की यह जिम्मेदारी है कि जिन छात्रों को ऐसा अवसर मिलता है, उन्हें सम्मान और समानता के साथ सीखने का अनुकूल माहौल मिले। कांग्रेस पार्टी सामाजिक भेदभाव की RSS की विचारधारा के खिलाफ लड़ना जारी रखेगी और संविधान में निहित समानता, सामाजिक न्याय और भाईचारे की रक्षा करेगी। IIT-बॉम्बे में युवा छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या का जिक्र करते हुए (जिसने जातिगत भेदभाव के सवाल खड़े करने के साथ-साथ विरोध प्रदर्शनों को भी जन्म दिया है) विरुधुनगर के लोकसभा सांसद ने कहा कि सरकार को सच्चाई छिपाने की कोशिश करने के बजाय खुलकर और पारदर्शी तरीके से बात करनी चाहिए। 

साहिल वाकोडे की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए जांच चल रही है, यह बताते हुए उन्होंने कहा कि बिना किसी जल्दबाजी में निष्कर्ष पर पहुंचे, गहन जांच जरूरी है और इसे जारी रहने दिया जाना चाहिए। TNCC प्रमुख ने यह जानना चाहा कि मोदी सरकार SC/ST/OBC समुदाय के छात्रों की गरिमा, सुरक्षा और समानता की रक्षा के लिए क्या कदम उठाने जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस संकट को हल करने के लिए संसद में उठाए गए सवालों पर देश के सामने पूरी जानकारी, डेटा और एक स्पष्ट कार्य योजना पेश करनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'बातें छिपाना सामाजिक न्याय नहीं है... इसकी रक्षा करना सरकार का कर्तव्य है।' 


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Content Writer

Sanjeev

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