19,324 वोटों की सुनामी के टूट गया BJP का मजबूत गढ़, जानिए प्रशांत किशोर की जीत के पीछे के कारण
punjabkesari.in Tuesday, Aug 04, 2026 - 03:14 PM (IST)
नेशनल डेस्क: बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में बीते दिन सामने आए उपचुनाव के नतीजों के बाद एक बड़ा सियासी उल्टफेर सामने आया है। यहां पर जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने अपने प्रतिद्वंदी बीजेपी उम्मीदवार नीरज कुमार को 19,324 वोटों के अंतर से हराया है। दरअसल यह उस सीट पर उपचुनाव हुए हैं, जो बीजेपी अध्यक्ष नीतिन नबीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। प्रशांत किशोर ने इस सीट पर जीत हासिल करते हुए सत्ताधारी एनडीए के चुनावी कैलकुलेशन को भी पूरी तरह से हराया है। बांकीपुर में बीजेपी की हार के ये 5 सबसे बड़े कारण रहे, जिनकी वजह से पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।
सम्राट चौधरी का सीएम बनना: सम्राट चौधरी का कमान संभालना: सम्राट चौधरी का सीएम बनना बीजेपी के लिए भारी पड़ गया। बीजेपी चुनाव के दौरान यह माहौल बनाने में असफल रही कि सरकार को मजबूत करने के लिए बांकीपुर से उनके उम्मीदवार को क्यों चुना जाए। नतीजतन, मतदाताओं ने सत्ता पक्ष के बजाय विपक्ष की भूमिका निभाने वाले उम्मीदवार पर भरोसा जताया।
नीतीश कुमार के सीएम पद से हटने का असर
बिहार के पूर्व सीएम नीतीश कुमार का अति-पिछड़ा (EBC) और महिला मतदाताओं के बीच एक मजबूत और भरोसेमंद आधार रहा है। बिहार में उनके सीएम पद से हटना NDA को प्रभावित किया है।
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भरत तिवारी का एनकाउंटर
चुनाव से ठीक पहले बिहार के राज्य आरा के बिलौटी गांव में हुए भरत तिवारी के एनकाउंटर के बाद से सरकार पर कानून वयव्स्था को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं। इस घटना के बाद से वहां का स्थानीय वर्ग सरकार से नाराज चल था, जिसका असर मतदान पर भी हुआ।
प्रशांत किशोर का प्रभावी नैरेटिव
चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद के नाम से जोड़ा गया एक कथित बयान चर्चा में आया। भले ही इस बयान का खंडन किया गया, लेकिन प्रशांत किशोर ने इसे बांकीपुर की जनता के स्वाभिमान और बीजेपी के अहंकार से जोड़कर प्रभावी ढंग से भुनाया। बीजेपी इस नैरेटिव का समय रहते मुकाबला नहीं कर सकी।
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बांकीपुर की जनता चाहती थी बदलाव
बांकीपुर के शहरी मतदाता बीजेपी और अन्य विपक्षी दलों से हटकर किसी तीसरे ऑप्शन की तलाश में थे। एक तरफ बीजेपी के लंबे शासन से बदलाव की चाहत थी, तो दूसरी तरफ आरजेडी के पुराने कार्यकाल का डर। ऐसे में प्रशांत किशोर के रूप में एक नए, शिक्षित और दोनों दलों से समान दूरी बनाए रखने वाले विकल्प को जनता ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।
