देश की 40% महिलाएं खुद को करती हैं असुरक्षित महसूस: ‘नारी 2025’ रिपोर्ट में महिला सुरक्षा को लेकर चिंताजनक आंकड़े
punjabkesari.in Thursday, Aug 28, 2025 - 09:54 PM (IST)

नेशनल डेस्कः भारत में महिलाओं की सुरक्षा एक गंभीर और जटिल समस्या बनी हुई है। ‘नारी 2025’ नामक राष्ट्रीय वार्षिक रिपोर्ट ने इस मुद्दे पर चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं, जो महिला सुरक्षा की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठाते हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार, देश की लगभग 40% महिलाएं अपने शहरों में खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करतीं। यह आंकड़ा शहरों के सार्वजनिक स्थानों, ऑफिस, स्कूल, कॉलेज और ट्रांसपोर्ट में महिलाओं की सुरक्षा की मौजूदा स्थिति का दर्दनाक सच बयान करता है।
बेटियों की सुरक्षा: हर माता-पिता की चिंता
अक्सर देखा जाता है कि बेटियां जब घर से बाहर जाती हैं, खासकर देर रात या नौकरी और पढ़ाई के लिए तो परिवार के लोग चिंतित हो जाते हैं। कई बार माताएं बेटियों की सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क रहती हैं। जैसे मैंने भी अपने अनुभव में महसूस किया है, कि जब मैं देर रात ऑफिस से घर लौटती हूं तो मेरी मां बार-बार फोन कर मेरी सलामती जानती हैं। यह चिंता हर मां-बाप की होती है, जो अपनी बेटियों के लिए रात-दिन एक चिंता बनी रहती है।
महिलाओं के साथ बढ़ता उत्पीड़न और भय
भारत के सड़कों, बाजारों, स्कूल-कॉलेज, ऑफिस और सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं के साथ लगातार उत्पीड़न की घटनाएं सामने आती रहती हैं। महिलाएं अक्सर घूरती नजरों, अश्लील टिप्पणियों, छेड़खानी और अनचाहे शारीरिक संपर्क का सामना करती हैं। कई बार महिलाएं इन घटनाओं का विरोध करती हैं, लेकिन शर्मिंदगी और भय के कारण कुछ महिलाएं चुप रह जाती हैं।
‘नारी 2025’ रिपोर्ट: डराने वाले तथ्य
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रिपोर्ट में देश के 31 शहरों की 12,770 महिलाओं का सर्वेक्षण किया गया है।
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रांची, श्रीनगर, कोलकाता, दिल्ली, फरीदाबाद, पटना और जयपुर को महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित शहर माना गया है।
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दिल्ली और फरीदाबाद में लगभग 42% महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं, जबकि रांची में यह आंकड़ा 44% है।
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वहीं, कोहिमा को महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित शहर माना गया, जहां 80% से ज्यादा महिलाएं सुरक्षित महसूस करती हैं। इसके अलावा विशाखापत्तनम, भुवनेश्वर, आइज़ोल, गंगटोक, ईटानगर और मुंबई भी अपेक्षाकृत सुरक्षित हैं।
उत्पीड़न के भयावह आंकड़े और सामाजिक धारणाएं
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रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में 7% महिलाओं ने उत्पीड़न का सामना किया, जिसमें 18-24 साल की युवा महिलाओं का जोखिम सबसे अधिक था।
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भारतीय महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर घूरना, छेड़खानी, अश्लील टिप्पणियां और शारीरिक उत्पीड़न जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
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महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों की आधिकारिक रिपोर्टिंग बहुत कम होती है। केवल 22% महिलाएं अपने अनुभवों की रिपोर्ट पुलिस को देती हैं, और केवल 16% मामलों में कार्रवाई होती है।
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सामाजिक दृष्टिकोण भी पीड़ित महिलाओं के खिलाफ होता है, उन्हें ही दोषी ठहराया जाता है, जैसे ‘छोटे कपड़े पहनने’ या ‘रात को अकेले बाहर जाने’ के लिए।
कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न और POSH नीति की जागरूकता
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कई कार्यस्थलों पर महिलाएं यौन उत्पीड़न का शिकार होती हैं, लेकिन शर्म या डर के कारण वे इस पर आवाज नहीं उठा पातीं।
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सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में ‘विशाखा गाइडलाइंस’ के तहत यौन उत्पीड़न रोकथाम (POSH) नीति लागू की है, लेकिन अभी भी 53% महिलाएं इसके बारे में अनजान हैं।
महिला सुरक्षा को लेकर सरकार और समाज की भूमिका
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया किशोर राहतकर ने ‘नारी 2025’ रिपोर्ट को एक महत्वपूर्ण पहल बताया है, जो महिला सुरक्षा के मुद्दे पर नीति निर्माताओं, सरकारों, कॉरपोरेट्स और समाज को जागरूक करने में मदद करेगी। रिपोर्ट महिलाओं की रोजमर्रा की सुरक्षा की वास्तविकताओं को उजागर करती है और एक सुरक्षित वातावरण बनाने के लिए सुझाव भी देती है।
पीवैल्यू एनालिटिक्स के एमडी प्रहलाद राउत के अनुसार, यह रिपोर्ट प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन के अनुरूप महिलाओं की सुरक्षा में सुधार के लिए एक मजबूत डेटा-आधारित आधार प्रदान करती है। यह सभी राज्यों के 31 शहरों की महिलाओं की आवाज़ को सरकार और समाज तक पहुंचाने का प्रयास है।