दिल्ली में 30% लोगों की आंखों की नजर कमजोर, सामने आई ये बड़ी वजह
punjabkesari.in Monday, Mar 09, 2026 - 08:20 PM (IST)
नेशनल डेस्क : राजधानी Delhi में लोगों की आंखों से जुड़ी परेशानियां तेजी से बढ़ रही हैं। All India Institute of Medical Sciences (एम्स) की एक नई रिपोर्ट में सामने आया है कि शहर की लगभग 30 प्रतिशत आबादी किसी न किसी प्रकार की दृष्टि संबंधी समस्या से प्रभावित है। यह जानकारी विश्व स्वास्थ्य संगठन को भेजी गई एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में सामने आई है।
यह अध्ययन Dr. Rajendra Prasad Centre for Ophthalmic Sciences के कम्युनिटी ऑप्थल्मोलॉजी विभाग द्वारा तैयार किया गया है, जिसमें राजधानी में आंखों की बीमारियों और उपचार सुविधाओं की स्थिति का आकलन किया गया है।
लाइफस्टाइल और स्क्रीन टाइम बन रहे कारण
एम्स के विशेषज्ञ Dr. Praveen Vashist के अनुसार बदलती जीवनशैली और मोबाइल, लैपटॉप जैसे डिजिटल उपकरणों का बढ़ता इस्तेमाल आंखों पर नकारात्मक असर डाल रहा है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने की आदत के कारण लोगों में नजर कमजोर होने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि खास तौर पर बच्चों और युवाओं में स्क्रीन टाइम बढ़ने से मायोपिया यानी दूर की चीजें साफ न दिखने की समस्या तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है।
क्या है RESAT टूल
यह अध्ययन World Health Organization द्वारा विकसित Refractive Error Situation Analysis Tool (RESAT) के माध्यम से किया गया है। इस टूल की मदद से किसी क्षेत्र में नजर से जुड़ी समस्याओं की स्थिति, इलाज की उपलब्धता और स्वास्थ्य सुविधाओं का आकलन किया जाता है। इसके जरिए यह भी पता लगाया जाता है कि उस इलाके में आंखों के इलाज के लिए कितनी सुविधाएं उपलब्ध हैं और किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है।
लाखों लोग चश्मे के बिना जी रहे
रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में करीब 29.5 प्रतिशत लोग, यानी लगभग 60 लाख लोग, ऐसे हैं जिन्हें चश्मे की जरूरत है लेकिन उन्हें सही इलाज या उचित चश्मा नहीं मिल पा रहा है। इनमें रिफ्रैक्टिव एरर और प्रेसबायोपिया जैसी समस्याएं शामिल हैं। आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में नजर की समस्याएं ज्यादा पाई जा रही हैं। इस आयु वर्ग के लगभग 70 प्रतिशत लोगों में दृष्टि से जुड़ी किसी न किसी तरह की समस्या मौजूद है।
बच्चों में मायोपिया के मामले बढ़े
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि स्कूल जाने वाले बच्चों में मायोपिया के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। लगातार मोबाइल, टैबलेट और कंप्यूटर का उपयोग इसके प्रमुख कारणों में से एक माना जा रहा है। इसके अलावा अध्ययन में यह भी पाया गया कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं को आंखों के इलाज की सुविधाएं अपेक्षाकृत कम मिल पाती हैं।
डॉक्टर और आई केयर सेंटर की कमी
रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में आंखों के इलाज के लिए मौजूद संसाधन आबादी के हिसाब से पर्याप्त नहीं हैं। राजधानी में कुल 249 आई केयर संस्थान हैं, जिनमें से लगभग 77.5 प्रतिशत निजी क्षेत्र में हैं, जबकि करीब 14.5 प्रतिशत सरकारी संस्थान हैं और लगभग 8 प्रतिशत केंद्र गैर-सरकारी संगठनों द्वारा संचालित किए जाते हैं।
दिल्ली में फिलहाल लगभग 1085 नेत्र विशेषज्ञ और करीब 489 ऑप्टोमेट्रिस्ट या आई टेक्नीशियन सेवाएं दे रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती आबादी को देखते हुए राजधानी में कम से कम 270 आई केयर सेंटर होने चाहिए, जबकि वर्तमान में केवल करीब 50 केंद्र ही उपलब्ध हैं।
