रात की डकैती, मंत्री की मौत… और अब उम्रकैद! AIADMK विधायक मर्डर केस में 19 साल बाद बड़ा फैसला

punjabkesari.in Friday, Nov 28, 2025 - 02:22 PM (IST)

नेशनल डेस्क: तमिलनाडु की राजनीति को झकझोर देने वाली 2005 की बहुचर्चित हत्या-डकैती कांड में लगभग दो दशक बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। चेन्नई की एक अतिरिक्त सत्र अदालत ने कुख्यात बावरिया गैंग के तीन सदस्यों को आजीवन कारावास की सजा दी है। यह वही मामला है जिसमें उस समय गुमिडिपुंडी से विधायक और राज्य के पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री रहे के. सुदर्शनम की घर में घुसकर हत्या कर दी गई थी।

कैसे हुई थी वारदात?
9 जनवरी 2005 की रात करीब 2:45 बजे, पेरियापलायम के पास थनाकुलम में मंत्री सुदर्शनम के घर में पांच बदमाशों ने धावा बोल दिया। बदमाशों ने पहले लूटपाट की, फिर गोली मारकर सुदर्शनम की हत्या कर दी। उनकी पत्नी और दोनों बेटों पर भी बेरहमी से हमला किया गया और सोने के गहने लूटकर गैंग फरार हो गई। यह घटना उस समय राज्य में भारी राजनीतिक हलचल का कारण बनी थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री जे. जयललिता ने खुद पुलिस को स्पेशल टीम बनाकर जांच का आदेश दिया था।

हरियाणा–राजस्थान से गिरफ्तार हुए आरोपी
पूर्व IGP एस.आर. जंगिड की अगुवाई में गठित विशेष पुलिस टीमों ने महीनों की छानबीन के बाद हरियाणा और राजस्थान में दबिश दी और बावरिया गिरोह के कई सदस्यों को गिरफ्तार किया। यह वही गैंग है जिसे उत्तर भारत में हाईवे लूट, घरों में घुसकर डकैती और कई हत्या मामलों के लिए कुख्यात माना जाता है।

 लंबी कानूनी लड़ाई, फिर फैसला
मामले में कुछ आरोपी जेल में ही बीमारी से मर गए, जबकि दो की उत्तर भारत में पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई थी। तीन महिला आरोपियों को जमानत के बाद फरार घोषित किया गया।

चार बचे हुए आरोपियों — जगदीश, राकेश, अशोक और जेलदार सिंह — के खिलाफ चेन्नई अदालत में ट्रायल चला। कुल 86 गवाहों के बयान और तमाम सबूतों की जांच के बाद अदालत ने 21 नवंबर को फैसला सुनाया। जज अब्राहम लिंकन ने जगदीश, राकेश और अशोक को हत्या, डकैती और अन्य आरोपों में दोषी मानकर उम्रकैद की सजा सुनाई। चौथे आरोपी जेलदार सिंह पर आरोप सिद्ध नहीं हुए।

 19 साल बाद न्याय की उम्मीद पूरी
करीब दो दशक बाद यह फैसला आया है, जिसने एक बार फिर सवाल उठाया है कि हाई-प्रोफाइल मामलों में भी न्याय प्रक्रिया कितनी लंबी खिंचती है। लेकिन सुदर्शनम के परिवार और तमिलनाडु पुलिस के लिए यह एक बड़ी राहत का फैसला माना जा रहा है।


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Content Editor

Anu Malhotra

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